
किसान आंदोलन के बहाने मोदी हटाओ मुहिम भी? ये 5 उदाहरण संघर्ष को राजनीति की तरफ खींचते हैं
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जिस तरह किसान नेताओं के विडियो सामने आ रहे हैं उससे यह बात क्लीयर होती जा रही है कि इस बार किसान आंदोलन का मुख्य उद्दैश्य एमएसपी पर गारंटी नहीं है. मूवमेंट का असली इरादा मोदी सरकार को हटाने का ही है.
किसान आंदोलन करने वाले संगठन हमेशा से खुद को राजनीति से अलग करते रहे हैं. लेकिन राजनीतिक संगठनों के साथ इन संगठनों का इस तरह का ताना-बाना जुड़ा हुआ है कि चाहकर भी ये लोग अराजनीतिक नहीं हो पाते हैं. वैसे भी जनता से जुड़े मुद्दों पर राजनीति न हो ये कैसे हो सकता है? शायद यही कारण है कि किसान आंदोलन पूरी तरह राजनीति का केंद्र बन जाता है. और जब किसान नेता खुलकर सरकार बदलने की बात करने लगते हैं तो इसे किस तरह राजनीति से अलग माना जा सकता है. इसी लिए कहा जा रहा है कि किसान आंदोलन तो बहाना है-असली काम तो मोदी सरकार को हटाना है. लोगों में चर्चा इस बात को लेकर है कि आखिर बिना राजनीतिक दलों के सपोर्ट के इतना बड़ा आंदोलन इतनी जल्दी कैसे खड़ा हो सकता है. 2020 में तीन कृषि कानूनों को लेकर पंजाब के 34 किसान संगठन विरोध कर रहे थे,जबकि यह आंदोलन में मात्र कुछ किसान संगठनों द्वारा ही किया जा रहा है. तो क्या यह सही है कि इस बार का आंदोलन किसी खास मकसद से हो रहा है. आइये उन कारणों की चर्चा करते हैं जिससे ऐसा लगने लगा है कि किसान आंदोलन में किसानों की चिंता कम है , ज्यादा चिंता इस बात को लेकर है कि किस तरह मोदी सरकार को हटाया जाए.
1-जगजीत सिंह डल्लेवाल का वायरल विडियो
भारतीय किसान यूनियन सिद्धूपुर के प्रधान जगजीत सिंह डल्लेवाल इस बार किसान आंदोलन के सबसे प्रमुख चेहरे हैं. जिस तरह पिछली बार गुरुनाम सिंह चढ़ूनी और राकेश टिकैत थे इस बार डल्लेवाल हैं. उनके मुंह से किसान आंदोलन की सच्चाई निकल गई है . डल्लेवाल का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह कह रहे हैं कि राम मंदिर बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ग्राफ बहुत बढ़ गया था, उसे नीचे लाना है.
वीडियो में डल्लेवाल कहते सुनाई पड़ रहे हैं, ‘मैं गांव में बात करता था, मौका बहुत थोड़ा है और मोदी का ग्राफ बहुत ऊंचा, क्या थोड़े दिनों में हम ग्राफ नीचे ला सकते हैं’ . सबसे बड़ी बात है कि डल्लेवाल इस विडियो क्लिप को न तो गलत बताया और न ही सही. उनका कहना केवल इतना है कि, यह मेरा अधिकारिक बयान नहीं है. डल्लेवाल के वीडियो आने के बाद किसान आंदोलन पर सवाल उठना स्वभाविक है. क्योंकि आम किसान तो बहुत कुछ बोलते रहते हैं . कोई पीएम को गाली देता है तो कोई खुलेआम खालिस्तान की बात करता है पर वही बात जब जिम्मेदार लोग बोलने लगते हैं तो वह नजीर बन जाता है. डल्लेवाल की बात से साफ संकेत मिलते हैं कि किसान आंदोलन का उद्देश्य लोक सभा चुनाव को लेकर आचार संहिता लगने से पहले मोदी के खिलाफ माहौल बनाने की है.
2-एक और किसान नेता तेजवीर सिंह का विडियो में भी वही बात
आंदोलन में शामिल पंजाब के किसान नेता तेजवीर सिंह का एक विडियो बहुत तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें वो किसान आंदोलन के जरिए देश की सरकार बदलने की बात कर रहे हैं. इतना ही नहीं वो किसान आंदोलन को विपक्ष की लड़ाई लड़ने वाला भी बता रहे हैं. मतलब साफ है कि कहीं न कहीं किसान नेताओं को एक बात समझाई गई है कि ये लड़ाई किसानों के अधिकारों और एमएसपी की गारंटी के लिए नहीं है बल्कि इन मुद्दों के नाम पर सरकार को ही बदलना है.

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