
कागजों में सिमटी क्राउड मैनेजमेंट गाइडलाइंस, प्रशासन की लापरवाही से जा रही लोगों की जान! 3 साल में भगदड़ की 8 घटनाएं
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देश भर में पिछले तीन सालों के अंदर भगदड़ की आठ बड़ी घटनाएं हुई हैं, जहां मरने वालों का आंकाड़ा अलग-अलग है. राज्य अलग-अलग हैं, लेकिन अगर कुछ सामान्य है तो वो है प्रशासन और सरकार की लापरवाही, जहां क्राउड मैनेजमेंट सिस्टम यानी भीड़ नियंत्रण करने की व्यवस्था चरमरा गई. जिसके चलते मासूम लोगों को अपनी जान गवां पड़ी.
बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर 4 जून 2025 को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की IPL 2025 जीत के जश्न के दौरान मची भगदड़ ने 11 लोगों की जान ले ली और 50 से अधिक लोग घायल हो गए. इस त्रासदी ने एक बार फिर देश में भीड़ प्रबंधन (क्राउड मैनेजमेंट) की नाकामी की कलाई खोल दी है. ये कोई पहली घटना नहीं है, पिछले कुछ सालों में देश के अलग-अलग हिस्सों में भगदड़ की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें सैकड़ों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. फिर चाहे वह धार्मिक आयोजन हों, रेलवे स्टेशन हों या फिर खेल के मैदान, प्रशासन की लापरवाही और भीड़ नियंत्रण में कमी के कारण ये त्रासदियां बार-बार हो रही हैं. राज्यों का नाम बदलता है, मरने वालों के आंकड़े अलग-अलग होते हैं.
दिल्ली पुलिस के पूर्व एसीपी वेद प्रकाश कहते हैं कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए और ऐसी घटनाओं से बचने के लिए नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने 2014 में विस्तृत गाइडलाइंस यानी दिशा-निर्देश जारी किए थे. इसके इतर राज्यों के पास अपनी गाइडलाइंस भी होती है जो जगह है और परिस्थितियों को देखकर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अनुकूल होती है. इतना ही नहीं पुलिस की साधारण ट्रेनिंग में भी क्राउड कंट्रोल मैनेजमेंट यानी भीड़ नियंत्रण व्यवस्था की बकायदा ट्रेनिंग होती है.
वहीं, पिछले कुछ सालों में देश भर में कई बड़ी भगदड़ की घटनाएं हुई हैं. जो प्रशासनिक नाकामी का सबूत देती हैं.
तीन साल में 8 घटनाएं
बता दें कि पिछले तीन सालों के अंदर भगदड़ की आठ बड़ी घटनाएं हुई हैं, जहां मरने वालों का आंकाड़ा अलग-अलग है. राज्य अलग-अलग हैं, लेकिन अगर कुछ सामान्य है तो वो है प्रशासन और सरकार की लापरवाही, जहां क्राउड मैनेजमेंट सिस्टम यानी भीड़ नियंत्रण करने की व्यवस्था चरमरा गई. जिसके चलते मासूम लोगों को अपनी जान गवां पड़ी.
क्या कहते हैं विशेषज्ञ

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