
'...कहीं हिन्दू मेरी मौत का इंतजार न करने लगें', जिन्ना की बीमारी, पाकिस्तान का मुस्तकबिल और भारत के बंटवारे की कहानी!
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मोहम्मद अली जिन्ना भारत को एक रखने की हर मुमकिन कोशिश के खिलाफ थे. उन्होंने माउंटबेटन को साफ-साफ कह दिया था,
'डॉक्टर अपनी बीमारी की बात तो मैं 12 साल से जानता हूं, मैंने इसको सिर्फ इसलिए जाहिर नहीं किया था कि हिंदू मेरी मौत का इंतजार ना करने लगें.' लाहौर के नामचीन फिजीशियन डॉक्टर कर्नल इलाही बख्श ने जब 1948 की जुलाई की एक रोज मोहम्मद अली जिन्ना को उनके टीबी रोग से जकड़े होने की खबर सुनाई तो उन्होंने बिना चौके, बिना तनाव के ये जवाब दिया. लेकिन जिन्ना का लुंज-पुंज शरीर उनके हौसले का साथ नहीं दे रहा था.
11 सितंबर 1948 को फेफडों के कैंसर से जूझ रहे पाकिस्तान राष्ट्र को गढ़ने वाले पौने 6 फीट के मोहम्मद अली जिन्ना के जर्जर शरीर का वजन मात्र 40 किलो रह गया था. खांसने पर उनके कफ से खून का चकता निकलता था और इंजेक्शन लगाने के बाद जब डॉक्टर उन्हें जिंदगी का दिलासा देते तो हिम्मत हार चुके जिन्ना खुद कहते, "नहीं... मैं जिंदा नहीं रहूंगा." ये घटनाओं से भरी और कल्पनाओं से परे उनकी जिंदगी का आखिरी दिन था.
लेकिन वकालत से खूब पैसा कमाये इस कमाये इस 71 साल के बूढ़े व्यक्ति में ड्रेसिंग सेंस को लेकर जबर्दस्त आग्रह था. अपने आखिरी दिनों में गंभीर रूप से बीमार होने और मृत्युशय्या पर पड़े होने पर भी उन्होंने औपचारिक पोशाक पहनने पर जोर दिया. वे अपनी बहन फातिमा जिन्ना से कहते थे- "मैं पजामा पहनकर नहीं मरूंगा."
नहीं सोचा था अपनी जिंदगी में पाकिस्तान बनते देखूंगा वरिष्ठ पत्रकार रेहान फजल अपनी एक रिपोर्ट में जिन्ना के जीवनीकार स्टेनली वोलपार्ट के हवाले से लिखते हैं कि 7 अगस्त 1947 को जब जिन्ना दिल्ली से कराची पहुंचे तो उन्होंने नौसेना के लेफ्टिनेंट एस एम एहसान की तरफ मुखातिब होकर कहा था कि तुम्हे शायद इस बात का अंदाजा न हो कि मैंने इस जिंदगी में पाकिस्तान बनते देखने की उम्मीद नहीं की थी.
लेकिन लाखों मौतें, बेहिसाब तबाही और जान-माल के अवर्णनीय नुकसान के बाद जिन्ना अपने मिशन में सफल रहे थे. भारत का बंटवारा हुआ और पाकिस्तान बना. विभाजन की इस त्रासदी और इस दौरान हुए हिंसा, विस्थापन और बलिदानों को याद करने के लिए भारत पाकिस्तान बनने के दिन को यानी 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका दिवस के रूप में मनाता है.
पोर्क सोसेज, बूढ़ा मुसलमान और जिन्ना का लंच

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