
ओडिशाः सभी पार्टियों के MLA's ने की सैलरी और भत्ते बढ़ाने की मांग, कहा- खर्चे पूरे नहीं हो रहे
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ओडिशा में वेतन वृद्धि की मांग पर सभी पार्टियों के विधायक एकमत नजर आए. विधानसभा में विधायकों ने कहा कि महंगाई की तुलना में MLA का वेतन बहुत कम है. हालांकि विधायकों को हर महीने लगभग एक लाख रुपये मिलते हैं. जबकि एक शोध से पता चला है कि राज्य में 147 सदस्यीय विधानसभा में से 95 विधायक करोड़पति हैं, जिनकी संपत्ति 1 करोड़ रुपये से अधिक है.
महंगाई की मार सिर्फ आम जनता ही नहीं, बल्कि राजनेताओं पर भी पड़ रही है.इसलिए ओडिशा में वैचारिक मतभेद भुलाकर सभी पार्टियों के नेता इस मुद्दे पर एकजुट नजर आए. सत्तारूढ़ बीजेडी, विपक्षी पार्टी भाजपा और कांग्रेस के विधायकों ने विधानसभा में शून्यकाल के दौरान वेतन और यात्रा भत्ते में बढ़ोतरी का मुद्दा उठाया.
विधायकों ने बढ़ती महंगाई का हवाला देते हुए कहा कि खर्चे पूरे नहीं हो रहे हैं. इसलिए वेतन और पेंशन में संशोधन किया जाए. शून्यकाल के दौरान विपक्षी पार्टी भाजपा के मुख्य सचेतक मोहन मांझी ने बताया कि अधिकांश वस्तुओं की लागत में वृद्धि हुई है, जबकि विधायकों के वेतन और भत्ते में 5 साल से बढ़ोतरी नहीं हुई है. उन्होंने बताया कि आखिरी बार 23 सितंबर 2017 को वृद्धि हुई थी. मोहन मांझी ने बताया कि बढ़ती महंगाई की तुलना में एक विधायक का वेतन बहुत कम है.
सभी विधायकों ने दिया समर्थन
मांझी ने कहा कि ओडिशा के विधायकों का वेतन कई अन्य राज्यों की तुलना में बहुत कम है. उन्होंने विधायकों के वेतन और यात्रा भत्ते में वृद्धि की मांग की. वहीं सत्तारूढ़ दल के विधायक अमर प्रसाद सत्पथी और कांग्रेस विधायक तारा प्रसाद बहिनीपति सहित अन्य विधायकों ने मांझी को अपना समर्थन दिया.
वेतन वृद्धि की मांग को बताया जायज
सत्पथी ने कहा कि वेतन वृद्धि की मांग जायज है, क्योंकि बढ़ती महंगाई को ध्यान में रखते हुए सभी वर्गों के वेतन में समय-समय पर संशोधन किया जाता है. वहीं, रायगडा से निर्दलीय विधायक मकरंदा मुदुली ने भी विधायकों का वेतन बढ़ाने की मांग की.

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