
ईरान का कनाडा से बदला... IRGC के जवाब में रॉयल कैनेडियन नेवी को घोषित किया आतंकी संगठन
AajTak
ईरान ने कनाडा के खिलाफ कड़ा प्रतिशोधात्मक कदम उठाते हुए उसकी नौसेना को आतंकी संगठन घोषित कर दिया है. उसने यह फैसला कनाडा द्वारा 2024 में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को आतंकी सूची में डालने के जवाब में लिया है.
ईरान और कनाडा के बीच कूटनीतिक तनाव और गहरा गया है. ईरान के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को एक बड़ा जवाबी कदम उठाते हुए कनाडा की रॉयल कैनेडियन नेवी को ‘आतंकी संगठन’ घोषित कर दिया. तेहरान ने कहा कि यह फैसला कनाडा द्वारा वर्ष 2024 में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को आतंकी संगठन की सूची में डालने के जवाब में लिया गया है. इससे दोनों देशों के बीच पहले से तनावपूर्ण रिश्तों में और कड़वाहट आएगी.
ईरानी विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि कनाडा का 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' को आतंकी संगठन घोषित करना अंतरराष्ट्रीय कानून के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन है. मंत्रालय के मुताबिक, IRGC ईरान की आधिकारिक सशस्त्र सेनाओं का हिस्सा है और उसे आतंकवादी संगठन करार देना एक संप्रभु देश के खिलाफ राजनीतिक रूप से प्रेरित फैसला है.
यह भी पढ़ें: 'अमेरिका-इजरायल-यूरोप से एक साथ जंग... लेकिन हम झुकेंगे नहीं', ईरानी राष्ट्रपति ने दे दिया वॉर अलर्ट
बयान में कहा गया कि 'पारस्परिकता के सिद्धांत' (Principle of Reciprocity) के तहत ईरान ने रॉयल कनाडियन नेवी को आतंकवादी संगठन घोषित किया है. हालांकि, ईरान ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इस घोषणा के व्यावहारिक परिणाम क्या होंगे. क्या इससे कनाडा की नौसेना या उसके कर्मियों पर कोई सीधा असर पड़ेगा या संपत्ति जब्त करना, यात्रा प्रतिबंध या अन्य कानूनी कार्रवाई शामिल होगी.
ईरान और कनाडा के रिश्ते 2020 में बिगड़े
ईरान और कनाडा के संबंध पिछले कई वर्षों से तनावपूर्ण हैं. वर्ष 2020 में यूक्रेन इंटरनेशनल एयरलाइंस की फ्लाइट PS752 को ईरान की IRGC ने गलती से मार गिराया था, जिसमें 176 लोग मारे गए थे, जिनमें कई कनाडाई नागरिक शामिल थे. इसके बाद कनाडा ने ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाए और 2024 में IRGC को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया. कनाडा का यह कदम अमेरिका के बाद ईरान के खिलाफ किसी बड़े पश्चिमी देश की पहली ऐसी कार्रवाई थी.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को होर्मुज पर धमकी अब उन्हीं पर उलटी पड़ चुकी है. ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की डेडलाइन देकर होर्मुज खोलने को कहा था, जिसके बाद अब ईरान ने ट्रंप के स्टाइल में ही उन्हें जवाब देते हुए कहा कि यदि अमेरिका उनपर हमला करेगा तो ईरान भी अमेरिका के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा.









