
ईरान-इजरायल युद्ध: कुछ देशों की नहीं, बल्कि पूरे विश्व में तेल, डॉलर और ग्लोबल शक्ति बनने की जंग
ABP News
इंटरनेशनल ट्रेड में डॉलर का शेयर धीरे-धीरे घट रहा है. ब्रिक्स देश, चाइना-रूस ट्रेड और इंडिया-रूस सेटलमेंट,इन सब में लोकल करेंसी का इस्तेमाल बढ़ रहा है.
ईरान के खिलाफ जंग और उनके सुप्रीम लीडर की मौत सिर्फ एक सैन्य घटना नहीं है; यह वेस्ट एशिया, ग्लोबल एनर्जी मार्केट और इंटरनेशनल फाइनेंस सिस्टम के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है. अमेरिका और इज़राइल इसे सिक्योरिटी और न्यूक्लियर थ्रेट से जोड़ते हैं, लेकिन जब हम एनर्जी डेटा, क़र्ज़ के आंकड़े और करेंसी ट्रेंड्स को साथ रखकर देखते हैं, तो तस्वीर कहीं बड़ी नजर आती है.
वेनज़ुएला और ईरान: ऊर्जा की महाशक्ति
सबसे पहले आंकड़ों की बात. वेनज़ुएला के पास लगभग 302 बिलियन बैरल्स प्रूवन ऑयल रिज़र्व्स हैं, जो दुनिया में सबसे अधिक हैं. वहीं ईरान के पास दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा नैचुरल गैस रिज़र्व है. विभिन्न इंटरनेशनल एनर्जी एस्टीमेट्स (आकलन) के अनुसार, उसके पास लगभग 1,200 ट्रिलियन क्यूबिक फीट (लगभग 1.2 क्वाड्रिलियन क्यूबिक फीट) गैस भंडार है.
ऐसे ऊर्जा-समृद्ध देश यदि डॉलर के बाहर ऑयल और गैस बेचने लगें, तो इसका असर सीधे ग्लोबल करेंसी स्ट्रक्चर पर पड़ता है. ईरान और वेनेज़ुएला दोनों पर लंबे समय से प्रतिबंध लगे हुए हैं और दोनों ने अल्टरनेटिव पेमेंट मेकैनिज़्म्स की कोशिश की है.













