
इजरायल-हमास युद्ध के एक साल पूरे, जानिए इसका दुनिया और भारत में क्या हुआ असर
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हमास-इजरायल जंग को एक साल पूरे हो गए हैं. हमास के हमले के बाद इजरायल ने जो पलटवार किया वो धीरे-धीरे क्षेत्रीय संघर्ष में तब्दील हो गया. आज हालात ये हैं कि जंग के सात मोर्चे खुल गए हैं और इजरायल हर मोर्चे पर फिलहाल भारी पड़ता नजर आ रहा है.
आज ही के दिन, यानि 7 अक्टूबर को पिछले साल हमास ने इजरायल पर हमला किया था. 7 अक्टूबर के काले दिन की बरसी इजरायल के इतिहास का सबसे काला दिन था. खौफनाक हमले में इजरायल के 12 सौ लोग मारे गए थे और 250 लोगों को हमास के आतंकी बंधक बनाकर ले गए थे. आज भी इजरायल के कई लोग हमास की कैद में है. यह जंग अब मध्य पूर्व तक फैल गई है.
जंग का असर भारत ही नहीं बल्कि दुनिया में भी देखने को मिला. इजरायल और हमास की जंग की वजह से लाल सागर और हिंद महासागर में समुद्री वाणिज्यिक यातायात की सुरक्षा प्रभावित रही. जिससे कई देशों के देश के ऊर्जा और आर्थिक हितों पर सीधा असर पड़ा और इसमें भारत भी शामिल रहा.
समुद्री व्यापार हुआ प्रभावित लाल सागर और अदन की खाड़ी में हमास समर्थक और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों कई वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया. हूतियों ने लाल सागर में कई मिसाइल और ड्रोन हमले किए और कई जहाजों को नुकसान पहुंचाया. इससे दुनिया के इस सबसे व्यस्त व्यापारिक मार्गों में शामिल लाल सागर के रास्ते में संकट पैदा हो गया था. बाद में कई कंपनियों को अपने रूट बदलने को मजबूर होना पड़ा और अफ्रीका के रास्ते व्यापार करना पड़ा. इससे कंपनियों की कॉस्टिंग भी काफी बढ़ गई थी.
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लाल सागर विश्व का प्रमुख व्यापारिक मार्ग है जहां से ना केवल पश्चिम एशिया बल्कि, अरब, यूरोप, अफ्रीका और भारत भी कारोबार करते हैं. इस मार्ग पर उस पर हूतियों के हमले से वैश्विक सप्लाई बाधित बाधित हो गई थी.लाल सागर से दुनिया का 12 फीसदी कारोबार होता है और प्रतिवर्ष करीब 10 अरब डॉलर से अधिक की कीमत के सामान का एक्सपोर्ट-इंपोर्ट इसी रास्ते से होता है. ऐसा में आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में लाल सागर कितनी अहमियत रखता है.
पोरबंदर के नजदीक समुद्र में हुआ था ड्रोन अटैक 2023 में जब हूतियों ने ऐलान किया था कि वे इजरायल से जुड़े किसी भी जहाज को निशाना बनाएंगे. हूती विद्रोहियों ने जिस समुद्री मार्ग पर हमला किया वहां से सबसे ज्यादा कच्चे तेल और अन्य ज़रूरी उत्पादों की आपूर्ति होती है. दिसंबर 2023 में गुजरात पोरबंदर से करीब 217 समुद्री मील की दूरी पर 21 भारतीय और एक वियतनामी चालक दल के सदस्यों वाले वाणिज्यिक जहाज पर तक ड्रोन अटैक हुआ जिसके बाद उसमें आग लग गई थी. ये जहाज बाद में मुंबई पहुंचा और रास्ते में भारतीय तटरक्षक जहाज आईसीजीएस विक्रम ने उसे सुरक्षा प्रदान की थी.

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