
इजरायल का बचाव करने के लिए अमेरिका ने किया वीटो, पाकिस्तान का फूटा गुस्सा
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पाकिस्तान के कराची शहर में बुधवार को पत्रकारों के साथ साथ नौजवानों और छात्रों ने इजरायल के खिलाफ प्रदर्शन किया. पाकिस्तानी प्रदर्शनकारियों ने सीजफायर और गाजा में फिलिस्तीनियों पर इजरायली हमले को फौरन बंद करने की मांग की.
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी फिलिस्तीन के पक्ष में दुनिया देशों को एकजुट करने की मुहिम में जुटे हुए हैं. इसके लिए वह तुर्की के बाद अमेरिका पहुंच गए हैं. न्यूयॉर्क के लिए रवाना होने से पहले कुरैशी ने तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन से मुलाकात की और इजरायल के खिलाफ देशों को लामबंद करने की रणनीति पर चर्चा की. हालांकि, फिलिस्तीन-इजरायल संघर्ष पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कोई सहमति नहीं बनने पर कुरैशी ने निराशा जाहिर की है. दरअसल, अमेरिका वीटो पावर का इस्तेमाल करते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को साझा बयान जारी करने से तीन बार रोक चुका है. तुर्की की राजधानी एक इंटरव्यू के दौरान पाकिस्तान के विदेश मंत्री कुरैशी ने कहा है कि फिलिस्तीनियों लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कोई सहमति नहीं बन पाई, यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है. सुरक्षा परिषद में अमेरिका की वीटो यानी असहमति के चलते इजरायल के खिलाफ निंदा को लेकर बयान जारी नहीं किया जा सका. कुरैशी के बयान को अमेरिका के रुख के खिलाफ माना जा रहा है. Pakistan thanks Turkey for standing with us in the #FATF and appreciate Turkey’s re-energizing of the Afghan peace process. We look forward to the early convening of the Istanbul Conference on Afghanistan. https://t.co/Y6zkF4LTvg
वॉशिंगटन में शांति परिषद की पहली बैठक में गाजा पट्टी की वर्तमान स्थिति और क्षेत्रीय स्थिरता पर गहन चर्चा हुई. बैठक में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका को मजबूत करने पर जोर दिया गया और निर्णय लिया गया कि गाजा में शांति बनाए रखने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल तैनात किया जाएगा. इस बल में इंडोनेशिया, मोरक्को, कजाकिस्तान, कोसोवो और अल्बानिया जैसे पांच देश अपने सैनिक भेजेंगे. देखें वीडियो.

आज सबसे पहले आपको उस रिपोर्ट के बारे में बताएंगे, जिसके मुताबिक अमेरिका ने ईरान पर हमले की तारीख मुकर्रर कर दी है. और ये हमला इस हफ्ते के आखिर तक हो सकता है. ट्रंप ने ईरान को धमकी देते हुए कहा है कि ईरान नहीं माना तो हमला होगा. रमज़ान का महीना शुरू हो गया है और ये मुसलमानों के लिए पाक महीना माना जाता है. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर अमेरिका ने ईरान पर रमजान के महीने में हमला किया तो मुस्लिम देश क्या करेंगे?











