
आतंकी ओसामा बिन लादेन की फैमिली से प्रिंस चार्ल्स ने लिए 1 मिलियन पाउंड, ब्रिटिश मीडिया की रिपोर्ट से खलबली
AajTak
ब्रिटेन के प्रिंस चार्ल्स ने आतंकवादी संगठन अल-कायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन के परिवार से 10 लाख पौंड का डोनेशन लिया है. एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ओसामा बिन लादेन की मौत के दो साल बाद प्रिंस चार्ल्स ने 2013 में उसके सौतेले भाई से ये डोनेशन ली थी.
ब्रिटेन के प्रिंस चार्ल्स यानी प्रिंस ऑफ वेल्स के दुर्दांत आतंकवादी और अल-कायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन के परिवार 10 लाख पौंड की डोनेशन लेने का मामला सामने आया है. एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है उन्होंने ये डोनेशन 2013 में लादेन के सौतेले भाई से ली, यानी की ओसामा बिन लादेन की मौत के करीब 2 साल बाद. ये डोनेशन प्रिंस ऑफ वेल्स चैरिटेबल फंड (PWCF) ने स्वीकार की. ओसामा बिन लादेन की मौत 2 मई 2011 को हुई थी.
समाचार एजेंसी पीटीआई ने ब्रिटेन के मशहूर अखबार 'द संडे टाइम्स' के हवाले से खबर दी है कि प्रिंस चार्ल्स ने अल-कायदा सरगना लादेन के सौतेल भाई बकर के साथ लंदन में मुलाकात की थी और कथित तौर पर 10 लाख पाउंड (करीब 9.6 करोड़ रुपये) की डोनेशन लेने को राजी हो गए.
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ब्रिटेन की राजगद्दी के वारिस प्रिंस चार्ल्स से उनके कई सीनियर एडवाइजर्स ने इस राशि को लौटाने के लिए कहा था. हालांकि, उनके क्लीयरेंस हाउस ने ऐसा होने से इंकार किया है. क्लीयरेंस हाउस का कहना है कि इस निर्णय में प्रिंस खुद निजी तौर पर शामिल रहे हैं.
क्लीयरेंस हाउस के एक प्रवक्ता ने स्काई न्यूज से कहा कि प्रिंस ऑफ वेल्स चैरिटेबल फंड ने हमें भरोसा दिलाया है कि इस डोनेशन को स्वीकार करने में पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया है. इसे स्वीकार करने का निर्णय चैरिटी के ट्रस्टी ने खुद से लिया है. प्रिंस ऑफ वेल्स चैरिटेबल फंड की स्थापना 1979 में हुई थी.
इस बीच प्रिंस ऑफ वेल्स चैरिटेबल फंड का कहना है कि शेख बकर बिन लादेन से ये डोनेशन 2013 में ली गई. इसे स्वीकार करने से पहले फंड के ट्रस्टी ने इस पर सावधानी के साथ पूरा विचार-विमर्श किया. इसके लिए कई स्रोतों से जानकारी जुटाई गई और पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया. यहां तक की सरकार से भी जानकारी हासिल की गई.
गौरतलब है कि ओसामा बिन लादेन अमेरिका में 11 सितंबर 2001 को हुए आतंकी हमले का मास्टरमाइंड था. इस हमले में अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड टॉवर्स को गिरा दिया गया था और करीब 3,000 लोगों की जान चली गई थी.

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गलीबाफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका-ईरान वार्ता का दावा फर्जी बताया. उनका कहना है कि यह वित्तीय और तेल बाजार को प्रभावित करने और अमेरिका-इजरायल की रणनीतिक विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए फैलाया गया. ईरान ने किसी भी वार्ता की पुष्टि से इनकार किया.

वेस्ट एशिया में छिड़े युद्ध में आज अमेरिका की तरफ से ऐसे संकेत आए हैं कि जैसे अमेरिका ईरान के सामने थोड़ा झुका हो. अमेरिका ने ईरान के एनर्जी और पावर प्लांट पर हमलों को फिलहाल टाल दिया है. लेकिन सवाल है कि क्यों? अमेरिका और इजरायल का गठबंधन युद्ध के 24 दिनों के बाद भी ईरान को पूरी तरह से झुका नहीं पाया है. शुरुआत में भले ही अमेरिका इजरायल को कामयाबी मिली हो. लेकिन अब तो ऐसा लग रहा है कि जैसे ईरान ने अपने ताकतवर बम युद्ध के इस हिस्से के लिए बचाकर रखे हों. इजरायल के न्यूक्लियर प्लांट तक ईरान के बम गिर रहे हैं. इजरायल का वर्ल्ड क्लास एयर डिफेंस सिस्टम फेल क्यों हो गया.

युद्ध के 24वें दिन आज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चौंकाने वाला बड़ा ऐलान किया. ट्रंप ने कहा कि बीते 2 दिनों से हो रही बातचीत के बाद मैंने ईरानी पावर प्लांट्स पर 5 दिनों के लिए हमले करना रोक दिया है. गौरतलब है कि भारतीय समय से आज रात ही ईरानी पावर प्लांट्स पर हमला करने की ट्रंप की डेडलाइन पूरी हो रही थी. सवाल ये है कि क्या ट्रंप ने अचानक यू टर्न लिया है? अगर ईरान के साथ बीते 2 दिनों से बातचीत हो रही थी तो लगभग 2 दिनों पहले उन्होंने अल्टीमेटम क्यों दिया था? क्यों उन्होंने शक्ति से शांति की बात की थी? सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान के तेवरों के आगे ट्रंप एग्जिट रूट ढूंढ रहे हैं? ट्रंप के ऐलान से क्या युद्ध रुक जाएगा? क्या ईरान और इजरायल युद्ध रोकेंगे? ईरान की मीडिया के अनुसार अमेरिका से ईरान का कोई संपर्क नहीं है.

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित हमलों को पांच दिनों के लिए रोकने का निर्देश दिया, जिसका कारण दोनों देशों के बीच जारी सकारात्मक बातचीत बताया गया. डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान से पांच दिनों के भीतर डील हो सकती है. हालांकि, ईरान इन दावों को खारिज कर रहा है. इससे पहले अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने को लेकर चेतावनी दी थी, जिस पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी.

ईरान लगातार इजरायल को निशाना बना रहा है. यरुशलम में ईरान के हमले की आशंका को लेकर सायरन बजे. आनन-फानन में लोग बम शेल्टर की ओर भागे. ये सायरन ईरान से मिसाइल और ड्रोन हमलों की चेतावनी देते हैं. हमसे ले पहले कुछ मिनटों का ही समय होता है जिसमें इजरायली नागरिक अपने करीबी बम शेल्टर में तब तक शरण लेते हैं जब तक कि खतरा टल न जाए. देखें वीडियो.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.







