
'आतंकवाद से लड़ाई में भारत का साथ दे चीन...', पीएम मोदी ने जिनपिंग के सामने उठाया टेररिज्म का मुद्दा
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पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात ऐसे वक्त में हो रही है, जब ट्रंप टैरिफ को लेकर भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव बना हुआ है. पीएम मोदी सोमवार को रूसी राष्ट्रपति पुतिन से भी मुलाकात करने वाले हैं.
चीन के तिआनजिन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच रविवार को SCO शिखर सम्मेलन से इतर द्विपक्षीय वार्ता हुई है. इस दौरान दोनों देशों ने अपसी सहयोग को बढ़ाने और संबंधों को मजबूत करने पर अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की. पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग के साथ बैठक में आतंकवाद का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया. साथ ही आतंकवाद को वैश्विक खतरा बताते हुए चीन से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत का साथ देने की अपील की है.
'मतभेद विवादों में न बदलें'
विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा कि पीएम मोदी और जिनपिंग ने द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों के साथ आतंकवाद जैसी चुनौतियों पर साझा आधार को बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया. साथ ही दोहराया कि भारत और चीन विकास के साझेदार हैं, प्रतिद्वंद्वी नहीं और मतभेद विवादों में नहीं बदलने चाहिए. मंत्रालय के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति शी को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए न्योता दिया, जिसकी मेजबानी भारत 2026 में करेगा.
जिनपिंग के साथ बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सौहार्द के महत्व पर चर्चा की. पीएम मोदी और शी ने सीमा मुद्दे के निष्पक्ष, उचित और आपसी तौर पर स्वीकार्य समाधान के लिए प्रतिबद्धता जताई. साथ ही पिछले साल सैनिकों की सफल वापसी और उसके बाद से सीमा पर शांति कायम रहने पर संतोष व्यक्त किया.
'दोस्त बने रहना सही विकल्प'
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि दोनों देशों के लिए दोस्त बने रहना सही विकल्प है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हाथी और ड्रैगन को एक-दूसरे की सफलता के लिए साथ मिलकर काम करना चाहिए. जिनपिंग ने कहा कि हम दोनों अपने लोगों की भलाई में सुधार लाने, विकासशील देशों की एकजुटता और कायाकल्प को बढ़ावा देने के साथ मानव समाज की प्रगति को गति देने की ऐतिहासिक जिम्मेदारी उठाते हैं.

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