
अमेरिका-भारत के बीच ट्रेड डील का क्या अब कोई मतलब नहीं रह गया?
BBC
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ़ को रद्द कर दिया है. इसके बाद हाल ही में भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बनी सहमति की प्रासंगिकता पर सवाल खड़े हो गए हैं.
डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ़ को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में अवैध करार दिए जाने के बाद ये सवाल उठने लगा है कि अब अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड डील का क्या होगा.
इस महीने की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत के साथ अंतरिम ट्रेड डील पर सहमति बनने की जानकारी देते हुए भारत पर लगे 50 प्रतिशत टैरिफ़ को घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की थी. साथ ही ये दावा किया था कि भारत ने रूसी तेल ख़रीद बंद करने पर रज़ामंदी दे दी है.
इस 50 प्रतिशत टैरिफ़ में 25 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ़ था जबकि 25 प्रतिशत टैरिफ़ रूसी तेल ख़रीद को लेकर दंडात्मक रूप से लगाया गया था.
जब शुक्रवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ़ को 6-3 के मत से ग़ैरक़ानूनी घोषित किया, तो उसके तुरंत बाद ट्रंप ने दूसरे क़ानून (ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122) का सहारा लेते हुए नए सिरे से पहले 10 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ़ लगाने और फिर शनिवार को इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने का एलान किया.
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नया ग्लोबल टैरिफ़ 24 फ़रवरी से 150 दिनों के लिए लागू होगा.
हालांकि शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला आने के बाद ट्रंप ने व्हाइट हाउस में एक लंबी प्रेस कॉन्फ़्रेंस की और उसमें भारत के साथ ट्रेड डील को लेकर पत्रकारों के सवालों के जवाब भी दिए.













