
'अगर मैं राष्ट्रपति होता तो ईरान की हिम्मत नहीं होती इजरायल पर हमला करने की', बोले- डोनाल्ड ट्रम्प
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ईरान द्वारा इजरायल पर किए गए ड्रोन और मिसाइल हमले पर अब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया सामने आई है. ट्रंप ने जो बाइडेन पर निशाना साधते हुए कहा है कि "अगर मैं राष्ट्रपति होता तो ऐसा कभी नहीं होता".
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजराइल के खिलाफ ईरान के जवाबी हमले की निंदा की है और कहा है कि "अगर मैं राष्ट्रपति होता तो ऐसा कभी नहीं होता." उन्होंने यह भी दावा किया कि अभूतपूर्व हमले पर राष्ट्रपति जो बाइडेन का राष्ट्र के नाम संबोधन "टेप" (रिकॉर्डेड) किया हुआ था. अपने ट्रुथ सोशल ऐप पर एक पोस्ट में रिपब्लिकन राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार ने कहा, "इजरायल पर हमला हो रहा है! ऐसा कभी नहीं होने दिया जाना चाहिए - अगर मैं राष्ट्रपति होता तो ऐसा कभी नहीं होता!"
ट्रम्प का यह पोस्ट तब आया जब ईरान ने रविवार को दमिश्क में अपने वाणिज्य दूतावास पर 1 अप्रैल के हवाई हमले के जवाब में सीधे इजरायली क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइलों की बौछार शुरू कर दी, जिसमें दो कमांडरों और छह सीरियाई नागरिकों सहित सात रिवोल्यूशनरी गार्ड मारे गए थे. हालांकि इजरायल ने हवाई हमले को स्वीकार नहीं किया है.
इजरायली रक्षा बलों ने दावा किया कि 200 से अधिक मिसाइलें और ड्रोन दागे गए और इसने बड़े पैमाने पर हुए इस हमले को रोक दिया है. सेना ने यह भी कहा कि दक्षिणी इजरायल में कई "छोटे हमले" किए गए हैं, जिनमें बुनियादी ढांचे को मामूली क्षति हुई है.
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बाइडेन पर किया अटैक
हमले के जवाब में, राष्ट्रपति बाइडेन ने कहा कि इजरायल की सुरक्षा के लिए अमेरिका का समर्थन "दृढ़" है और वाशिंगटन "इज़राइल के लोगों के साथ खड़ा होगा और ईरान से इन खतरों के खिलाफ उनकी रक्षा का समर्थन करेगा.' लेकिन, डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरानी हमले पर राष्ट्र के नाम बाइडेन के संबोधन की भी आलोचना की और कहा कि यह "टेप" किया गया था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही मीडिया के सामने सेना भेजने की बात से इनकार किया हो, लेकिन 2,200 मरीन सैनिकों के साथ यूएसएस त्रिपोली युद्धपोत का मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ना कुछ और ही इशारा कर रहा है. ट्रंप का मुख्य मकसद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के तेल मार्ग को ईरान के कब्जे से छुड़ाना और वहां दबे यूरेनियम भंडार को सुरक्षित करना है. अगर ये सेना तैनात होती है, तो यह पिछले दो दशकों में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य कदम होगा.

महायुद्ध तीसरे हफ्ते में पहुंच गया है...लेकिन बम-बारूद-गोले थम ही नहीं रहे ..। कहां तो युद्ध ईरान को न्यूक्लियर पावर बनने से रोकने के लिए शुरू हुआ...और कहां ये जंग तेल युद्ध बनकर दुनिया को धधका रहा है...। समझ नहीं आ रहा कि ये जंग किसे धुरंधर बना रहा...एक तरफ तबाही है...तो दूसरी तरफ तेल-गैस-हीलियम संकट...जो हर घर...हर परिवार पर असर डाल रहा है..

अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध में अब तेल-गैस के ठिकानों पर हमले से तनाव बढ़ गया है. पूरे दुनिया पर ऊर्जा का संकट बढ़ता जा रहा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से तेल के बाजार में पहले ही उथल-पुथल मची है. अब दोनों ओर से ताजा हमलों से पूरी दुनिया महंगाई के बड़े संकट की ओर बढ़ती जा रही है. देखें लंच ब्रेक.

चाहे हालात शांति के हों या युद्ध जैसे तनावपूर्ण, जिंदगी कभी नहीं रुकती, इसकी मिसाल लेबनान में देखने को मिली. मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच यहां दुनिया के अलग-अलग देशों से आए हजारों लोग, जो काम के सिलसिले में लेबनान में रह रहे हैं, उन्होंने इजरायली हमलों और तमाम चुनौतियों के बावजूद ईद-उल-फितर का त्योहार पूरे उत्साह के साथ मनाया. संघर्ष और अनिश्चितता के बीच भी लोगों ने एक-दूसरे के साथ खुशियां साझा कीं.

होर्मुज को लेकर तनातनी जारी है. इस बीच छह देशों ने एक बयान जारी किया है ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और नीदरलैंड्स ने कहा है कि वे हॉर्मुज़ में सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए अपना योगदान देने के लिए तैयार हैं. हालांकि, इटली, जर्मनी और फ्रांस ने बाद में स्पष्ट किया कि वे तत्काल किसी सैन्य सहायता की बात नहीं कर रहे हैं. इन देशों ने क्या शर्त रखी है. जानें.

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