
US की महिला, क्रिप्टो करेंसी में निवेश और लाखों डॉलर की धोखाधड़ी... ऐसे पकड़ में आया शातिर जालसाज लक्ष्य विज
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आरोपी ने उसके कंप्यूटर तक अनधिकृत रिमोट एक्सेस हासिल किया और उसके मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी का उपयोग करके पीड़िता के नाम पर एक क्रिप्टो करेंसी खाता बनाया. इसके बाद उस महिला को उक्त क्रिप्टोकरेंसी खाते में 400,000 अमेरिकी डॉलर ट्रांसफर करने की सलाह दी.
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) 2002 के तहत क्रिप्टोकरेंसी हैंडलर लक्ष्य विज को गिरफ्तार कर लिया है. उसे मंगलवार को दिल्ली की पीएमएलए से संबंधित स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया. जहां अदालत ने उसे 5 दिनों के लिए ईडी की रिमांड पर भेज दिया है. ईडी ने यह कार्रवाई एक अमेरिकी नागरिक को धोखा देने के लिए कई आरोपियों के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर की है.
सीबीआई की एफआईआर के अनुसार, आरोपियों ने एक अमेरिकी महिला से संपर्क किया और उसे बैंक में रखे गए निवेश को क्रिप्टो करेंसी खाते में स्थानांतरित करने के लिए राजी किया. आरोपियों ने यह दावा किया कि उसका मौजूदा खाता सुरक्षित नहीं है. कॉल करने वाले ने उसके कंप्यूटर तक अनधिकृत रिमोट एक्सेस हासिल किया और उसके मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी का उपयोग करके पीड़िता के नाम पर एक क्रिप्टो करेंसी खाता बनाया.
इसके बाद उस महिला को उक्त क्रिप्टोकरेंसी खाते में 400,000 अमेरिकी डॉलर ट्रांसफर करने की सलाह दी गई. महिला ने ऐसा ही किया. लेकिन बाद में जब पीड़ित महिला ने अपने खाते में लॉग इन किया, तो उसने पाया कि उसका खाता खाली है. पीड़िता की शिकायत की जानकारी भारतीय अधिकारियों को दी गई, जिसके आधार पर सीबीआई ने कुछ आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की.
ईडी की जांच में पता चला कि पीड़ित के बैंक खाते से 400,000 अमेरिकी डॉलर की ठगी की गई राशि को क्रिप्टो खाते में स्थानांतरित करने के बाद, बिटकॉइन को कई वॉलेट में प्रसारित किया गया और कई परतों के माध्यम से अन्य व्यक्तियों को स्थानांतरित किया गया ताकि पैसे का पता लगाया जा सके. क्रिप्टो वॉलेट में कई बार ट्रांसफर के बाद, क्रिप्टो करेंसी खाते से पैसे को डमी संस्थाओं के बैंक खातों में भेजा गया और उसके बाद, भुगतान एग्रीगेटर्स के माध्यम से सैकड़ों व्यक्तियों और संस्थाओं को इंडियन करेंसी में यह पैसा भेजा गया.
ईडी ने इस मामले में 6 जून 2024 को तलाशी अभियान चलाया था और कई डिजिटल साक्ष्य एकत्र किए थे. कई व्यक्तियों के बयान पीएमएलए की धारा 17 और 50 के तहत दर्ज किए गए थे. ये वो लोग थे, जिनके वॉलेट का उपयोग क्रिप्टोकरेंसी और बिटकॉइन के हस्तांतरण में किया गया था.
ईडी की जांच के दौरान एकत्र किए गए साक्ष्यों से पता चला कि लक्ष्य विज ही वह व्यक्ति था, जो विभिन्न व्यक्तियों को बिटकॉइन ट्रांसफर करने के निर्देश जारी कर रहा था. निर्देश मुख्य रूप से व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से जारी किए गए थे, जिनकी प्रतियां ईडी द्वारा बरामद की गई थीं. लक्ष्य विज को मनी लॉन्ड्रिंग का दोषी पाया गया और उसे 22 जुलाई 2024 को नई दिल्ली में गिरफ्तार किया गया. अब इस मामले में ईडी के दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय की टीम आगे की जांच कर रही है.

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