
काम पहले मंजूरी बाद में, 342% ज्यादा खर्च... केजरीवाल के 'सरकारी बंगले' पर CAG की रिपोर्ट
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दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के कार्यकाल के दौरान आधिकारिक सीएम आवास के रेनोवेशन को लेकर कैग रिपोर्ट ने कई अनियमितताएं सामने आई हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बंगले के रेनोवेशन पर अनुमानित लागत से 342% अधिक खर्च हुआ.
दिल्ली विधानसभा में सोमवार को पेश भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के कार्यकाल के दौरान आधिकारिक आवास '6, फ्लैगस्टाफ रोड' के रेनोवेशन को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. कैग रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रोजेक्ट पर कुल ₹33.66 करोड़ खर्च किए गए, जो तय अनुमानित लागत से 342% अधिक था.
कैग की यह रिपोर्ट 2022 की है, जिसे पूर्ववर्ती आम आदमी सरकार ने विधानसभा के पटल पर नहीं रखा था. दिल्ली की वर्तमान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विधानसभा में सोमवार को इसे पेश किया. रिपोर्ट में बताया गया है कि बंगले के रिनोवेशन पर हुए कुल खर्च में से ₹18.88 करोड़ 'हाई क्वालिटी, आर्टिजन, एंटीक और डेकोरेटिव' आइटम्स पर खर्च किए गए. अरविंद केजरीवाल 2015 से 2024 तक मुख्यमंत्री के रूप में रहे, जो राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया था.
भाजपा ने इसे 'शीश महल' करार देते हुए आम आदमी पार्टी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए. फरवरी 2025 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी यह प्रमुख मुद्दा रहा. इस चुनाव में भाजपा ने आम आदमी पार्टी को हराकर सत्ता से बाहर कर दिया. कैग रिपोर्ट में दिल्ली लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं. इसमें कहा गया कि कई चरणों में सीमित निविदा (Restricted Tendering) प्रक्रिया अपनाई गई, जिसके लिए पर्याप्त कारण दर्ज नहीं थे.
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कंसल्टेंसी फर्मों के चयन में पारदर्शिता नहीं
कंसल्टेंसी सर्विस के लिए तीन फर्मों के चयन का भी कोई स्पष्ट आधार नहीं मिला. लागत निर्धारण में भी अनियमितताएं सामने आईं. अनुमान तय करते समय एक साल पुराने रेट का इस्तेमाल कर उन्हें 50 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया, जिससे कुल लागत में इजाफा हुआ. कैग रिपोर्ट में बंगले के रेनोवेशन के लिए ठेकेदारों के चयन में भी पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं. पांच ठेकेदारों को चुना गया, लेकिन जांच में पाया गया कि केवल एक ही निर्धारित मानकों पर खरा उतरता था. इसके अलावा, निर्माण क्षेत्र 1,397 वर्ग मीटर से बढ़ाकर 1,905 वर्ग मीटर कर दिया गया, यानी करीब 36 प्रतिशत की वृद्धि की गई.

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