
CAPF बिल से किसे फायदा और किसका नुकसान? जानें संसद में क्यों नहीं हो सका पेश
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राज्यसभा में आज केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक (CAPF Bill) को लेकर भारी हंगामा हुआ. सरकार इस बिल को पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार थी और यह सदन की कार्यसूची में भी शामिल था, लेकिन विपक्ष के विरोध के कारण सरकार को इसे पेश करने का निर्णय फिलहाल टालना पड़ा.
संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में सोमवार को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक पेश होना था. तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इसका कड़ा विरोध किया. TMC सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने इसका विरोध करते हुए कहा कि संसदीय प्रक्रिया के तहत किसी भी बिल को पेश करने से 48 घंटे पहले उसे सदस्यों को सर्कुलेट किया जाना चाहिए, जो इस मामले में नहीं किया गया.
डेरेक ओ ब्रायन ने संसदीय कार्य मंत्री से प्रक्रिया का पालन करने का अनुरोध करते हुए कहा कि कार्यसूची में CAPF बिल पेश करने का जिक्र है, लेकिन सदस्यों को यह 48 घंटे पहले नहीं मिला. मेरा अनुरोध है कि संसद की प्रक्रिया का पालन किया जाए. ऐसा लगता है कि सरकार प्रक्रिया से ज्यादा बंगाल में अघोषित आपातकाल लगाने में रुचि रखती है.
टीएमसी के सांसदों ने प्रक्रिया का पालन नहीं होने का आरोप लगाते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया. इसके बाद सरकार ने विपक्ष के रुख को देखते हुए बिल पेश करने का फैसला फिलहाल रोक दिया. एक वरिष्ठ सरकारी मंत्री ने कहा कि कुछ मतभेद सामने आए हैं, जिन्हें सुलझाने का प्रयास किया जाएगा.
आम सहमति बनाने की कोशिश, अमित शाह की बैठकें
सदन की कार्यवाही के बाद गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्षी दलों के सांसदों के साथ एक अहम बैठक की, जिसमें संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू भी मौजूद थे. सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक CAPF बिल और महिला आरक्षण विधेयक पर विपक्ष के साथ आम सहमति बनाने के उद्देश्य से बुलाई गई थी.
दूसरी ओर, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी विपक्षी सांसदों जैसे जयराम रमेश, जॉन ब्रिटास, सुप्रिया सुले और प्रमोद तिवारी के साथ रणनीति बनाने के लिए बैठक की. साथ ही, अमित शाह ने NDA के घटक दलों के फ्लोर लीडर्स के साथ भी चर्चा की.

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