
UP Election: छोटा जनाधार, बड़ा मैजिक... UP चुनाव का रुख बदल सकते हैं ये छोटे दल, आखिर किनके लिए साबित होंगे ट्रंप कार्ड?
AajTak
यूपी के चुनावों में छोटे दलों की अहमियत किसी से छिपी नहीं है. ये छोटे दल अपने जातीय और सामाजिक दायरे में दखल के चलते चुनावों में बड़ा असर डालते हैं. आरएलडी, अपना दल, सुभासपा, निषाद पार्टी जैसे दल सूबे की चुनावी रणभूमि में अपना प्रभाव दिखाते आए हैं.
उत्तर प्रदेश की सियासत में जातीय आधार वाले छोटे-छोटे दल अपने दम पर तो बेदम नजर आते हैं, लेकिन किसी बड़े दल के साथ जुड़ जाए तो सारे समीकरण ध्वस्त कर देते हैं. यही वजह है कि बीजेपी और सपा दोनों ही पार्टियां सत्ता पर काबिज होने के लिए इन्हीं छोटे दलों को अपनी बैसाखी बना रही है. ऐसे में सूबे की सियासी जंग में बड़ी पार्टियों की कामयाबी बहुत कुछ छोटे दलों पर निर्भर रहती है तो छोटे दलों को भी विधानसभा पहुंचने और सत्ता में भागीदार होने की उम्मीद नजर आ रही है.

आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









