
UP: गेहूं खरीदी केंद्रों पर पसरा सन्नाटा, वजह- किसानों को सरकार से ज्यादा दाम दे रहे व्यापारी
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UP News: सरकार की मुफ्त राशन योजना और अंतराष्ट्रीय बाज़ार में गेहूं की मांग बढ़ने पर फसल के दाम बढ़ गए हैं. गेहूं का सरकारी दाम 2015 रुपए तो व्यापारी खेत पर जाकर 2050 से 2100 रुपये देकर किसानों से उनकी फसल खरीद रहे हैं.
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में 62 गेहूं खरीदी केंद्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ है. इसकी वजह है कि किसान सरकारी तंत्र की लंबी लाइन से बचने के लिए अपने खेतों से ही अच्छे दाम पर गेहूं व्यापारियों को बेच रहे हैं. अंतर्राष्ट्रीय बाजार में गेहूं की मांग बढ़ने पर दाम भी काफी बढ़ गए हैं और ऊपर से सरकार की मुफ्त राशन योजना के चलते भी गेहूं की मांग बढ़ी है. रबी की फसल का सरकारी दाम 2015 रुपये है जबकि आढ़ती यानी व्यापारी खेत से ही किसानों की उपज को 2050 रुपये से ज्यादा का दाम देकर नकद खरीद रहे हैं.
13 दिन बाद भी गेहूं क्रय केंद्रों पर प्रभारी मायूस
योगी सरकार ने प्रदेश के किसानों के गेहूं की खरीद के लिए बीते 1 अप्रैल से गेहूं क्रय केंद्रों का संचालन शुरू करवा दिया है. संचालन शुरू हुए 13 दिन हो रहे हैं लेकिन अभी तक केंद्रों पर किसान अपनी फसल बेचने के लिए नहीं पहुंच रहे हैं, जिसकी वजह से केंद्र प्रभारियों में मायूसी देखने को मिल रही है. समय बीतता चला जा रहा है लेकिन लक्ष्य के अनुसार गेहूं की खरीद का कार्य नहीं हो रहा है, क्योंकि किसान अपना गेहूं बेचने के लिए सरकारी केंद्रों पर अभी तक नहीं पहुंचा है.
नई मंडी स्थल पर सन्नटा
बाराबंकी के नवीन मंडी स्थल पर सन्नटा पसरा हुआ है. यहां बने सभी कांटों यानी क्रय केंद्रों पर सन्नटा छाया हुआ है, लेकिन शाम होते होते गेहूं से लदी एक ट्रॉली आ गयी, तो मायूस केंद्र प्रभारियों के चेहरे पर मुस्कुराहट दिखी. लेकिन तब भी 99 % किसान अपना गेहूं बेचने के लिए सरकारी गेहूं क्रय केंद्र पर नहीं पहुंच रहे हैं.
केंद्र प्रभारी ने बताया कारण

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