
'UCC आने के बाद उत्तराखंड में नहीं रिपोर्ट हुआ हलाला-बहुविवाह का एक भी मामला', धामी सरकार का दावा
AajTak
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू हुए एक वर्ष पूरा हो गया है. उत्तराखंड बीजेपी के मुताबिक यूसीसी के बाद राज्य में हलाला और बहुविवाह का एक भी मामला सामने नहीं आया और विवाह पंजीकरण में उल्लेखनीय बढ़ोतरी आई है.
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू हुए एक वर्ष पूरा हो गया है. 27 जनवरी की तारीख राज्य के सामाजिक, संवैधानिक और प्रशासनिक इतिहास में एक अहम अध्याय के रूप में दर्ज हो चुकी है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना, जिसने यूसीसी को प्रभावी रूप से लागू किया. बीजेपी के मुताबिक इस फैसले ने संविधान की भावना को धरातल पर उतारा और सामाजिक समानता से समरसता की दिशा में नई मिसाल पेश की.
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने यूसीसी लागू करने का संकल्प लिया था. सत्ता में आने के बाद पहली ही कैबिनेट बैठक में इस पर निर्णय लिया गया. व्यापक जनसंवाद, विशेषज्ञ समिति और विधायी प्रक्रिया के बाद 7 फरवरी 2024 को यूसीसी विधेयक विधानसभा से पारित हुआ. 11 मार्च 2024 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद सभी औपचारिकताएं पूरी कर 27 जनवरी 2025 को उत्तराखंड में यूसीसी को विधिवत लागू किया गया.
उत्तराखंड बीजेपी का कहना है कि यूसीसी के लागू होने से राज्य में महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय को नई मजबूती मिली है. कानून लागू होने के बाद बीते एक वर्ष में हलाला और बहुविवाह का एक भी मामला सामने नहीं आया है. महिलाओं को समान अधिकार, सम्मान और सुरक्षा का कानूनी आधार मिला है, जिससे कुप्रथाओं पर प्रभावी रोक लगी है. आंकड़ों के अनुसार, यूसीसी लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. पहले जहां प्रतिदिन औसतन 67 विवाह पंजीकरण होते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर प्रतिदिन 1400 से अधिक हो गई है.
एक वर्ष से भी कम समय में 4 लाख 74 हजार 447 से अधिक विवाह पंजीकरण किए जा चुके हैं. ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए कहीं से भी सुरक्षित और सरल पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध कराई गई है. यूसीसी के तहत विवाह पंजीकरण के साथ-साथ विवाह विच्छेद, वसीयत पंजीकरण और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़ी सेवाएं भी डिजिटल और पारदर्शी बनाई गई हैं. बीते एक वर्ष में 5 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 95 प्रतिशत से ज्यादा का निस्तारण हो चुका है. 22 भाषाओं में उपलब्ध सेवाओं और मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्था के चलते निजता उल्लंघन की कोई शिकायत सामने नहीं आई है.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि यूसीसी किसी धर्म या पंथ के खिलाफ नहीं, बल्कि समाज की कुप्रथाओं के खिलाफ है. इसका उद्देश्य सभी नागरिकों को समान अधिकार और सम्मान दिलाना है. उन्होंने कहा, 'यूसीसी की एक वर्ष की यात्रा ने यह साबित कर दिया है कि उत्तराखंड ने केवल एक कानून लागू नहीं किया, बल्कि न्याय, समानता और गरिमा पर आधारित एक नई सामाजिक चेतना को जन्म दिया है, जो पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है.'

Guna Hawala Scandal: गुना का हाईप्रोफाइल हवाला कांड अब एक नई करवट ले रहा है. जहां एक तरफ ट्रेनी IPS आयुष जाखड़ की जांच टीम गुजरात के व्यापारी को बयान के लिए बुला रही है, वहीं दूसरी तरफ निवर्तमान एसपी अंकित सोनी के तबादले ने शहर में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है. 'लेडी सिंघम' हितिका वासल ने कमान संभाल ली है, लेकिन अंकित सोनी के समर्थन में हिंदू संगठन सड़कों पर उतर आए हैं.

इजरायल अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर पूरी दुनिया में देखने को मिल रहा है और भारत भी इससे अछूता नहीं है, इस युद्ध के चलते भारत में भी ऊर्जा संकट पैदा हो रहा था, इसी संकट को लेकर पीएम मोदी ने आज संसद में पहली बार सार्वजनिक तौर पर बयान दिया. पश्चिम एशिया में जंग के हालातों पर पीएम मोदी ने लोकसभा में 25 मिनट की स्पीच दी उन्होंने कहा कि तनाव खत्म होना चाहिए. बातचीत से ही समस्या का समाधान है. पीएम ने कहा कि नागरिकों और पावर प्लांट पर हमले मंजूर नहीं हैं. होमुर्ज का रास्ता रोकना स्वीकार नहीं होगा ‘सरकार की कोशिश है कि देश में तेल-गैस संकट न हो. इसके लिए 27 की जगह अब 41 देशों से इंपोर्ट कर रहे हैं. पश्चिम एशिया में एक करोड़ भारतीय रहते हैं. उनकी सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है.

हैदराबाद में आगामी रामनवमी शोभा यात्रा को लेकर गोशामहल के विधायक टी. राजा सिंह ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि साल 2010 से लगातार शोभा यात्रा आयोजित की जा रही है, लेकिन हर साल पुलिस की ओर से बाधाएं खड़ी की जाती हैं. उनका आरोप है कि सिदंबर बाजार, पुराना पुल और बेगम बाजार जैसे इलाकों में विशेष रूप से लाठीचार्ज के लिए टास्क फोर्स तैनात की जाती है. साथ ही उन्होंने दावा किया कि हर साल उनके खिलाफ FIR दर्ज की जाती है और इस बार भी पुलिस अपनी गलतियों का ठीकरा उन पर फोड़ सकती है.










