
TRF को बैन करने में लगे 6 साल, PAK का जिक्र तक नहीं... अमेरिका का आतंक पर डबल स्टैंडर्ड!
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अमेरिका ने द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) को वैश्विक आतंकी संगठन घोषित कर दिया है. यह लश्कर-ए-तैयबा का एक फ्रंट है. इस कार्रवाई पर कई सवाल उठ रहे हैं, जैसे अमेरिका को यह फैसला लेने में छह साल क्यों लगे, जबकि उसके पास टीआरएफ की गतिविधियों की खुफिया जानकारी थी. अमेरिका ने अपने बयान में पाकिस्तान का नाम क्यों नहीं लिया, जबकि लश्कर और टीआरएफ दोनों के लिए पाकिस्तान जन्नत जैसा है.
अमेरिका ने उस TRF यानी ‘दि रेजिस्टेंस फ्रंट’ को आतंकी संगठन घोषित किया है जिसने पहलगाम में आतंकी हमला किया था. यह एक बड़ा घटनाक्रम रहा क्योंकि मौजूदा समय में अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्ते बहुत अच्छे हैं. इसके बावजूद भारत, अमेरिका से TRF को आतंकी संगठन घोषित करवाने में सफल रहा है. पहलगाम हमले में 26 निर्दोष लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई थी.
TRF को अमेरिका ने क्यों माना आतंकी संगठन?
TRF लश्कर-ए-तैयबा का एक फ्रंट यानी अगला चेहरा है जिसने भारत पर कई हमले किए हैं. भारत पहले ही इसे आतंकी संगठन घोषित कर चुका है लेकिन पाकिस्तान इसे लगातार बचाता रहा है. अब अमेरिका ने भी TRF को Foreign Terrorist Organization (FTO) और Specially Designated Global Terrorist (SDGT) घोषित कर दिया है.
अमेरिकी विदेश मंत्री का बयान
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि TRF ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी. उन्होंने कहा कि यह 2008 के मुंबई हमले के बाद भारत पर सबसे बड़ा आतंकी हमला था. TRF ने भारतीय सुरक्षा बलों पर कई हमलों की जिम्मेदारी भी ली है. अमेरिकी सरकार का यह कदम राष्ट्रपति ट्रंप के उस वादे को पूरा करता है जिसमें उन्होंने पीड़ितों को न्याय दिलाने की बात कही थी.
पहलगाम हमले के बाद TRF की पहचान

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