
Sameer Wankhede Vs Nawab Malik: शादी और नौकरी से जुड़े आरोपों पर हाईकोर्ट में इन दो दलीलों पर घिर गए वानखेड़े
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Sameer Wankhede Vs Nawab Malik: बॉम्बे हाईकोर्ट से समीर वानखेड़े के पिता ध्यानदेव वानखेड़े को झटका लगा है. वानखेड़े के पिता ने नवाब मलिक पर उनके परिवार के खिलाफ कुछ भी बोलने और लिखने पर रोक लगाने की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है.
Sameer Wankhede Vs Nawab Malik: मुंबई एनसीबी के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े के पिता ध्यानदेव की याचिका पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने महाराष्ट्र के मंत्री और एनसीपी नेता नवाब मलिक पर कोई भी प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया है. हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि मलिक की ओर से वानखेड़े और उनके परिवार पर जो भी आरोप लगाए गए, उन्हें पूरी तरह से गलत नहीं कहा जा सकता.

कोर्ट ने पारदर्शी और जवाबदेह प्रणाली बनाने पर जोर दिया ताकि बिना नसबंदी वाले कुत्तों की रिपोर्टिंग हो सके. 28 जनवरी को सरकारों की ओर से सॉलिसिटर जनरल अपनी दलीलें प्रस्तुत करेंगे. कोर्ट ने एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट के पॉडकास्ट पर नाराजगी जताई और मामले की गंभीरता को रेखांकित किया. ये सुनवाई आवारा कुत्तों की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता को जाति के आधार पर अपमानित करने की स्पष्ट मंशा होनी चाहिए। पटना हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एफआईआर और आरोप पत्र में जाति-आधारित अपमान के अभाव को रेखांकित किया। कोर्ट ने एससी एसटी एक्ट की धारा 3(1) के प्रावधानों को दोहराते हुए कहा कि केवल अपशब्दों का प्रयोग अपराध नहीं बनता।

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