
RSS का चुनाव, ABVP का प्रभाव और राम माधव की परिवार वापसी
AajTak
संघ के केंद्रीय नेतृत्व में हुए ताजा परिवर्तन और बीजेपी से राम माधव की वापसी के क्या हैं मायने, संघ की आगे की रूपरेखा का क्या है ताना बाना... एक विश्लेषण
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी तीन बातें फिलहाल चर्चा में हैं. एक है केंद्रीय टीम में हुए परिवर्तन, दूसरा है संघ में एबीवीपी जैसे अनुषांगिक संगठन का मजबूत होते जाना और तीसरा है राम माधव की भाजपा से संघ में वापसी. पहले चर्चा तीसरे बिंदु की. संघ में हाल-फिलहाल में दो लोगों की भाजपा से वापसी हुई है. रामलाल और राम माधव. दोनों संघ की ओर से भाजपा में भेजे गए थे. दोनों ने एक ठीकठाक समयावधि तक पार्टी में महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियां संभालीं. रामलाल संगठनमंत्री रहे तो राम माधव कश्मीर से पूर्वोत्तर तक अपनी अहम भूमिका निभा रहे थे. लेकिन दोनों की पार्टी में पारी समाप्त हुई. लेकिन पार्टी से मुक्त होकर दोनों ही खाली नहीं हैं. संघ के विशाल परिवार ने दोनों को दोबारा अंगीकार कर लिया है. रामलाल के बाद अब राम माधव की भी पार्टी से परिवार में वापसी हो चुकी है.
उत्तर प्रदेश की सियासत में उल्टी गंगा बहने लगी है. मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर हुआ विवाद अब बड़ा मुद्दा बन गया है. जहां खुद अविमुक्तेश्वरानंद के तेवर सरकार पर तल्ख हैं, तो वहीं बीजेपी पर शंकराचार्य के अपमान को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज में संगम नोज तक पालकी पर जाकर स्नान करने से उन्हें रोका था.

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

संभल में दंगा मामले के बाद सीजेएम के तबादले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इस पर सीजेएम का अचानक तबादला हुआ और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. इस विवाद में राजनीतिक सियासत भी जुड़ी है. हाई कोर्ट के आदेशानुसार जजों के ट्रांसफर होते हैं लेकिन इस बार बहस हुई कि क्या यहां राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया.









