
Pakistan: सरकार गिरते ही इमरान खान की पार्टी में मतभेद, फवाद चौधरी और शाह महमूद कुरैशी आमने-सामने
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Shah Mahmood Qureshi vs Fawad Chaudhry: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के पद से हटते ही इमरान खान की पार्टी में उठापटक शुरू हो गई है. PTI के दो बड़े नेता शाह महमूद कुरैशी और फवाद चौधरी नेशनल असेंबली से सभी सदस्यों के इस्तीफे के मसले पर खुलकर आमने- सामने आ गए हैं.
पाकिस्तान में इमरान खान की सरकार गिरते ही उनकी राजनीतिक पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) में मतभेद खुलकर नजर आने लगा है. पार्टी के नेता एक ही मुद्दे पर विरोधाभासी बयानबाजी करते दिखाई दे रहे हैं. इस तरह की स्थिति तब बन गई, जब इमरान सरकार में विदेश मंत्री रहे शाह महमूद कुरैशी (Shah Mahmood Qureshi) और पूर्व केंद्रीय मंत्री फवाद चौधरी (Fawad Chaudhry) एक मुद्दे पर आमने-सामने आ गए.
दरअसल, 9 अप्रैल की देर रात इमरान खान की सरकार गिर गई थी. उनके खिलाफ नेशनल असेंबली में अविश्वास प्रस्ताव पास हो गया था. इसके ठीक अगले दिन 10 अप्रैल की दोपहर में PTI नेता फवाद चौधरी और उनकी पार्टी के साथ सबसे मजबूत गठबंधन के तहत जुड़े हुए आवामी मुस्लिम लीग के अध्यक्ष शेख राशिद ने प्रेस कांफ्रेंस की थी. इस दौरान दोनों ने दावा किया था कि उनकी पार्टी के नेशनल असेंबली सदस्यों ने सामूहिक इस्तीफा देने का फैसला किया है.
कुरैशी और चौधरी की बात एक-दूसरे के विपरीत
फवाद चौधरी और शेख रशीद की प्रेस कांफ्रेंस के बाद शाम को पीटीआई के उपाध्यक्ष शाह महमूद कुरैशी ने स्पष्ट किया कि पार्टी के सभी सदस्यों ने अभी तक नेशनल असेंबली से इस्तीफा देने का फैसला नहीं किया है. पाकिस्तानी चैनल ARY न्यूज के एक कार्यक्रम में कुरैशी ने कहा कि इमरान खान की अध्यक्षता में पार्टी की कोर कमेटी की बैठक हुई. मीटिंग में चर्चा की गई कि क्या शहबाज शरीफ के सामने पीएम के चुनाव के लिए PTI उम्मीदवार के तौर पर उनके नाम को अंतिम रूप देना सही है? साथ ही मौजूद हालातों में पार्टी को नेशनल असेंबली में रहना चाहिए या नहीं? इस पर भी बात हुई. हालांकि, इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका.
कुरैशी ने इमरान के पाले में फेंकी गेंद
पार्टी के नेशनल असेंबली सदस्यों के सामूहिक इस्तीफे के बारे में कुरैशी ने कहा कि इमरान खान जो चाहेंगे, वही होगा. वे जो भी निर्णय लेंगे, सभी को स्वीकार होगा. हमारी पार्टी लोकतांत्रिक है. इमरान सभी की राय सुनने के बाद ही कोई फैसला लेते हैं. उन्होंने कहा कि मेरी व्यक्तिगत राय यह है कि हमें असेंबली के अंदर विरोध करना चाहिए और बाहर जनता से भी संपर्क में रहना चाहिए. ज्यादातर सदस्यों का भी यही मानना है.

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