
IPAC पर पड़े छापे पर ममता बनर्जी का 'छापा', आखिर कौन सा राज खुलने का डर?
AajTak
चुनाव मैनेजमेंट के लिए जानी-मानी कंपनी आईपैक पर कोलकाता में पड़ा छापा एक पुराने कोल स्कैम से जुड़ा बताया जा रहा है. लेकिन TMC इसे पॉलिटिकल वेंडेटा मानती है. क्योंकि चुनाव से ठीक तीन महीने पहले यह कार्रवाई हुई है. ममता बनर्जी ने फिलहाल आपदा में अवसर ढूंढ रही है. तृणमूल कांग्रेस ने इस छापे के खिलाफ पूरे प्रदेश में प्रदर्शन शुरू कर दिया है.
पश्चिम बंगाल की राजनीति में ड्रामा और टकराव कोई नई बात नहीं है, लेकिन 8 जनवरी 2026 को कोलकाता में घटी घटना ने इसे एक नया आयाम दे दिया. प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (IPAC) के साल्ट लेक स्थित ऑफिस और उसके प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी की. IPAC, जो TMC की चुनावी रणनीति का मास्टरमाइंड है, पर यह रेड मनी लॉन्ड्रिंग और कोल स्कैम से जुड़ी जांच का हिस्सा बताई जा रही है.
लेकिन जो बात सबको चौंका रही, वह थी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का खुद मौके पर पहुंचना और ED अधिकारियों से सीधा टकराव. ममता ने ED पर TMC के इंटरनल डेटा और हार्ड डिस्क जब्त करने का आरोप लगाया, और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को नॉटी और नास्टी होम मिनिस्टर तक कह डाला.
सोशल मीडिया पर ममता बनर्जी और ईडी अफसरों की नोकझोंक वायरल हो गया, जहां ममता को दस्तावेज और लैपटॉप लेकर आते-जाते देखा गया. सवाल उठता है: आखिर कौन सी नस दब गई कि ममता जैसी अनुभवी नेत्री ने अपनी गरिमा को दांव पर लगाकर जांच में हस्तक्षेप किया? यह घटना 2026 के विधानसभा चुनावों के नजदीक होने से और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, जहां TMC और BJP के बीच जंग चरम पर है. आइये IPAC की भूमिका, ममता की प्रतिक्रिया और इसके पीछे की राजनीतिक गणित को समझते हैं.
बंगाल के चुनावों में IPAC की भूमिका
IPAC, जिसे इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी के नाम से जाना जाता है. जनसुराज के फाउंडर प्रशांत किशोर द्वारा स्थापित यह एक राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म है. यह फर्म डेटा एनालिटिक्स, ग्राउंड स्ट्रैटेजी और डिजिटल कैंपेनिंग के जरिए पार्टियों को चुनाव जीतने में मदद करती है. पश्चिम बंगाल में IPAC का रोल बेहद महत्वपूर्ण रहा है. 2021 के विधानसभा चुनावों में IPAC ने TMC की खेला होबे कैंपेन डिजाइन की, जिसने BJP की आक्रामक रणनीति को मात दी. TMC ने 213 सीटें जीतीं, जबकि BJP को 77 पर संतोष करना पड़ा. 2024 के लोकसभा चुनावों में भी IPAC की स्ट्रैटेजी ने TMC को 29 सीटें दिलाईं. अब 2026 के चुनावों की तैयारी में ममता ने 2025 में ही IPAC के साथ करार की घोषणा की थी. प्रतीक जैन, IPAC के डायरेक्टर, TMC के IT चीफ के रूप में काम कर रहे हैं.
IPAC के पास TMC का विशाल डेटा बैंक है. वोटर लिस्ट, ओपिनियन पोल्स, सोशल मीडिया एनालिसिस और लोकल इंटेलिजेंस. यह डेटा चुनावी रणनीति का आधार है. ED की रेड में यदि यह डेटा लीक या जब्त होता, तो TMC की पूरी कैंपेन पटरी से उतर सकती है. ममता ने इसे दस्तावेज चोरी करार दिया, और कहा कि ED TMC के हार्ड डिस्क जब्त करने आई थी.

हमास और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के बीच बढ़ती सांठगांठ चिंता का विषय है. हमास नेता नाजी जहीर ने LeT से जुड़ी PMML की बैठक में हिस्सा लिया है. भारतीय एजेंसियां नजर रख रही हैं. पाकिस्तान ISI बांग्लादेश में भारत-विरोधी नेटवर्क सक्रिय कर रहा है. ऑनलाइन रेडिकलाइजेशन से युवाओं को उकसाया जा रहा है. भारत की सुरक्षा पर खतरा बढ़ सकता है.

केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में चौंकाने वाली घटना सामने आई है. अपने पिता के खिलाफ एक युवक शिकायत दर्ज कराने कमिश्नर ऑफिस पहुंचा था. बाहर निकलते ही उसने कमिश्नर दफ्तर परिसर से एक पुलिसकर्मी की बाइक चोरी कर ली. सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने कुछ ही घंटों में आरोपी को गिरफ्तार कर बाइक बरामद कर ली है.

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की समस्या पुरानी और गंभीर होती जा रही है. सर्दियों में वायु गुणवत्ता बिगड़ने पर GRAP लागू होता है, जिसमें निर्माण और वाहनों पर रोक लगाई जाती है, लेकिन इससे स्वच्छ हवा नहीं मिल सकी. सुप्रीम कोर्ट ने CAQM की कार्यप्रणाली पर कड़ी आलोचना की, इसे प्रदूषण के मूल कारणों को न समझने और स्थायी समाधान न देने का दोषी ठहराया.

केरल से क्रूरता का दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है. कांजीकोड इलाके में पांच साल की मासूम बच्ची को बिस्तर गीला करने की सजा इतनी बेरहमी से दी गई कि उसकी सौतेली मां ने उसके प्राइवेट पार्ट्स को गर्म करछुल से जला दिया. घटना का खुलासा तब हुआ, जब आंगनबाड़ी वर्कर ने बच्ची को दर्द में देखा और पुलिस को सूचना दी. पुलिस ने आरोपी महिला को अरेस्ट कर लिया है.









