
बढ़ते विरोध के बीच ईरान का बदला सुर, खामेनेई शासन ने हताहतों की बात मानी, विदेशी साजिश का दावा
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ईरान में जारी व्यापक विरोध प्रदर्शनों पर पहली बार आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है. खामनेई शासन ने स्वीकार किया कि हिंसा और हताहत हुए हैं, लेकिन इसे घरेलू असंतोष नहीं बल्कि बाहरी साजिश बताया. अमेरिका और इज़रायल से जुड़े “आतंकी एजेंट” देश में अस्थिरता फैला रहे हैं.
मध्य पूर्व में स्थित ईरान में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. बीते 12 दिनों से देश के बड़े शहरों में खामेनेई शासन के खिलाफ जनता सड़कों पर है. गुरुवार रात को यह विरोध और ज्यादा उग्र हो गया. राजधानी तेहरान समेत 100 से ज्यादा शहरों में हालात बेकाबू नजर आए. कई जगह आगजनी हुई और प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की खबरें भी सामने आईं. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान को धमकी दे दी कि अगर प्रदर्शनकारियों पर हमला किया जाता है तो तगड़ा हमला किया जाएगा. इस चेतावनी के बाद ईरान ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है.
इन व्यापक प्रदर्शनों के बीच ईरान की सरकारी टीवी ने पहली बार चुप्पी तोड़ी है. लंबे समय तक हालात पर पर्दा डाले रखने के बाद अब सरकारी प्रसारक ने एक कार्यक्रम में यह माना है कि प्रदर्शनों के दौरान हिंसा हुई और लोगों के हताहत होने की घटनाएं भी हुई हैं. यह स्वीकारोक्ति अपने आप में बताती है कि हालात अब छिपाने लायक नहीं बचे हैं.
हालांकि, सरकार ने इस हिंसा की जिम्मेदारी जनता के गुस्से पर डालने से इनकार कर दिया है. सरकारी टीवी ने दावा किया है कि देश के भीतर आगजनी और हिंसक घटनाओं के पीछे अमेरिका और इज़रायल से जुड़े “आतंकी एजेंट” हैं. यानी शासन एक बार फिर अंदरूनी असंतोष को विदेशी साजिश बताने की लाइन पर चलता दिख रहा है.
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इस पूरे घटनाक्रम को AP ने रिपोर्ट किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ते विरोध के दबाव में अब ईरानी सरकार अपनी रणनीति बदलती नजर आ रही है. पहले जहां प्रदर्शनों को नजरअंदाज किया जा रहा था या मामूली बताने की कोशिश हो रही थी, अब हताहतों की बात मानकर हालात की गंभीरता स्वीकार करनी पड़ रही है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव खामेनेई शासन पर बढ़ते अंदरूनी दबाव का साफ संकेत है. आर्थिक संकट, महंगाई और सामाजिक असंतोष ने जनता के गुस्से को और भड़का दिया है. हालात ऐसे बन चुके हैं कि शासन के लिए इसे काबू में रखना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है.

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