
I2U2 समिट में एनर्जी और फूड सिक्योरिटी जोर, PM मोदी बोले- 6 क्षेत्रों में निवेश के लिए सहमत हुए
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I2U2 चार देशों का समूह है. इसमें भारत समेत अमेरिका, इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं. इस समूह की पहली बैठक वर्चुअल बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि सभी देश खाद्य, ऊर्जा सुरक्षा समेत 6 अमह मुद्दों पर निवेश करने के लिए सहमत हुए हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज I2U2 समिट के तहत अमेरिका, यूएई और इजरायल के राष्ट्राध्यक्षों के साथ मंच साझा किया. इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि आज की इस पहली समिट से ही I2U2 ने एक सकारात्मक एजेंडा स्थापित कर लिया है. उन्होंने कहा कि हमने कई क्षेत्रों में संयुक्त प्रोजेक्ट की पहचान की है, और उनमें आगे बढ़ने का रोडमैप भी बनाया है. पीएम मोदी ने कहा कि बढ़ती हुई वैश्विक अनिश्चिताओं के बीच हमारा कॉपरेटिव फ्रेमवर्क व्यावहारिक सहयोग का एक अच्छा मॉडल भी है. पीएम मोदी ने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि I2U2 से हम वैश्विक स्तर पर ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण योगदान करेंगे.
बता दें कि आज के इस वर्चुअल समिट में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन, इजरायल के पीएम येर लैपिड और संयुक्त अरब अमीरात के शासक मोहम्मद बिन जाएद अल-नाहन भी शामिल थे.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि I2U2 फ्रेमवर्क के तहत हम 6 अहम क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने को राजी हुए हैं. इनमें जल, ऊर्जा, परिवहन, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा शामिल है. यह स्पष्ट है कि I2U2 का विजन और एजेंडा प्रगतिशील और व्यावहारिक है.
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि आज हम जिन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं उनमें बढ़ता जलवायु संकट या खाद्य सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता शामिल है. राष्ट्रपति बाइडेन इस मंच से भी रूस पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि यूक्रेन के खिलाफ रूस के क्रूर और अकारण हमले ने अस्थिर ऊर्जा बाजारों को और भी बदतर बना दिया गया है.
उन्होंने कहा कि अगले 3 वर्षों में, यह ग्रुप नई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की पहचान करने के लिए काम करने जा रहा है, जिसमें हम निवेश कर सकते हैं और एक साथ विकसित कर सकते हैं. बाइडेन ने कहा कि अगर हम एक साथ रहें तो हम बहुत कुछ कर सकते हैं.
इजरायल के पीएम ने कहा कि हमारा लक्ष्य प्राइवेट पार्टनर को विकास में भागीदार बनाना है. हम चार अलग-अलग देश हैं. इसके बावजूद यह स्पष्ट है कि हम सभी एक ही चीज चाहते हैं जिसमें बुनियादी ढांचे का विकास, बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करना शामिल है.

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