
Ground Report: लेबनान की बेका घाटी पर ही क्यों बरस रहे हैं इजरायल के सबसे ज्यादा बम?
AajTak
इजरायल ने लेबनान के दक्षिणी हिस्से में जमीनी कार्रवाई भी शुरू की है. उसका प्रयास लेबनान के अंदरूनी इलाकों में घुसने की है. लेकिन हिज्बुल्लाह से इजरायली सेना को कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है.
इजरायल ने अपनी बमबारी का दायरा दक्षिण बेरूत से लेबनान के उत्तर में बढ़ा दिया है. पिछले एक हफ्ते से आईडीएफ ने पूर्वी लेबनान के बेका घाटी को भी निशाना बनाया है. इजरायली सेना यहां हवाई हमलों के साथ आर्टिलरी सेलिंग (तोप से गोले दागना) भी कर रही है. बेका बेरूत से लगभग 30 किमी (19 मील) पूर्व में स्थित है. यह घाटी पश्चिम में माउंट लेबनान और पूर्व में एंटी-लेबनान पहाड़ों के बीच स्थित है.
बेका घाटी औसतन 120 किलोमीटर (75 मील) लंबी और 16 किलोमीटर (9.9 मील) चौड़ी है. लेबनान हिल्स के उस पास इजरायली की उत्तरी सीमा स्थित है. वहां से आईडीएफ लगातार इस इलाके को निशाना बना रहा है. बेका वैली हिज्बुल्लाह की सुरक्षित पनाहगाह मानी जाती है. यहां से सीरिया की सीमा नजदीक है. इजरायली हमले का दबाव बढ़ने पर हिज्बुल्लाह लड़ाके बेका वैली छोड़कर आसानी से सीरिया में प्रवेश कर सकते हैं. इजरायल हिज्बुल्लाह ठिकानों को बेका वैली में हमले कर रहा है.
इजरायल ने लेबनान के दक्षिणी हिस्से में जमीनी कार्रवाई भी शुरू की है. उसका प्रयास लेबनान के अंदरूनी इलाकों में घुसने की है. लेकिन हिज्बुल्लाह से इजरायली सेना को कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है. हिज्बुल्लाह के लड़ाके घात लगाकर न सिर्फ रॉकेट हमले कर रहे हैं, बल्कि एंटी-टैंक मिसाइलों का उपयोग भी इजरायली सेना के विरुद्ध कर रहे हैं. इसके अलावा हिज्बुल्लाह ने बारूदी सुरंगे बिछाकर रखी हैं. इस कारण इजरायली सेना को फूंक-फूंककर अपने कदम आगे बढ़ाने पड़ रहे हैं.
इजरायल को आने वाले दिनों में जब तक यह सुनिश्चित नहीं होगा कि हिज्बुल्लाह की ताकत कमजोर पड़ गई है, तब तक वह लेबनान में बहुत ज्यादा अंदर घुसने से हिचकिचाएगा. माना जा रहा है कि इजरायल फिलहाल ईरान के मिसाइल हमलों का जवाब देने की बजाय अपना पूरा ध्यान लेबनान ऑपरेशन पर लगाएगा, जब तक देश के दक्षिणी हिस्से में उसे हिज्बुल्लाह से चुनौती मिल रही है. इजरायल ने बेरूत-दमिश्क राजमार्ग पर हमला करके इसे बेका वैली से काट दिया है. बता दें कि बेका वैली से सीरिया में जाने के लिए इसी राजमार्ग का उपयोग किया जाता है.

अमेरिका और ईरान में इस समय टकराव देखने को मिल रहा है. अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संकेत दे रहा है. अमेरिका का विमानवाहक युद्धपोत अब्राहम लिंकन समुद्र के रास्ते ईरान के करीब पहुंच चुका है जिससे ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध की आशंकाएं बढ़ गई हैं. हालांकि, अरब देश अमेरिका को ईरान पर हमला करने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. लगातार धमकियों के बावजूद ईरान पर सीधे हमले से क्यों बच रहा अमेरिका? देखें श्वेतपत्र.

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए हैं. अमेरिका का विमानवाहक युद्धपोत अब्राहम लिंकन समुद्र के रास्ते ईरान के करीब पहुंच चुका है जिससे ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध की आशंकाएं बढ़ गई हैं. वहीं अरब देश अमेरिका को ईरान पर हमला करने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. दूसरी ओर, ईरान ने इजरायल के आठ प्रमुख शहरों पर हमले की योजना तैयार की है. इस बढ़ती तनाव की स्थिति से मध्य पूर्व में सुरक्षा खतरे और बढ़ सकते हैं.

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला करते हुए ट्रंप को ईरान में हुई मौतों, नुकसान और बदनामी के लिए जिम्मेदार ठहराया और उन्हें 'अपराधी' बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान में हालिया अशांति अमेरिका की साजिश है और ट्रंप ने खुद इसमें दखल देकर प्रदर्शनकारियों को उकसाया.

व्हाइट हाउस ने गाजा को फिर से बसाने और उस पर शासन के लिए बने 'बोर्ड ऑफ पीस' के सदस्यों की लिस्ट जारी की है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप बोर्ड के अध्यक्ष होंगे. जबकि विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर सदस्य होंगे. देखें दुनिया आजतक.









