
Ground Report: ‘मैं सरोगेट बनना चाहती हूं’...FB पर एक पोस्ट और लग गई दलालों और बच्चा चाहने वालों की कतार!
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एनेस्थीशिया के असर में थी, जब बच्चे को मेरे पास से हटा लिया गया. होश में आई तो आसपास कोई नहीं था, सिवाय बीच-बीच में आती नर्सों के. दुधमुंहे बच्चे की जगह हवा में दवाओं की तेज गंध. अस्पताल से लौटी तो महीनों परेशान रही. ताकत के साथ दूध बंद करने की दवा खानी पड़ी. अब भी हर साल उस बच्चे का जन्मदिन मनाती हूं, जिसकी मैं सरोगेट थी, बिना ये जाने कि वो बेटी है या बेटा.
बीते कुछ सालों में सरोगेसी को लेकर काफी सख्त नियम बने ताकि कमर्शियल सरोगेसी रुक सके. इस बीच ह्यूमन ट्रैफिकिंग के मामले भी आए, जहां गरीब लड़कियों को जबरन सरोगेट बनाया जा रहा था. एक्ट आने के बाद अब ऐसी खबरें तो नहीं मिलतीं, लेकिन भीतर-भीतर काफी कुछ खदबदा रहा है. पिछली कड़ी में आपने पढ़ा कि कैसे भारी पॉकेट वाला क्लाइंट अपने लिए सरोगेट खोज/छांट सकता है ( यहां पढ़ें). इस किस्त में जानिए, क्या है एक सरोगेट होने के मायने.
सरोगेसी के अंडरग्राउंड मार्केट में खुद को सरोगेट दिखाने के पहले मैंने होमवर्क करना चाहा.
इस काम में मेरी मदद कर रहे एक शख्स ने कहा- वे मजबूरी में आती हैं. शुरू में सिर्फ पैसे-पैसे करती हैं. लेकिन महीना बढ़ते-बढ़ते बदल जाती हैं. बार-बार पेट छुएंगी. अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट देखकर रोएंगी. दो बार तो ये भी हुआ कि बच्चे को एक बार देख लेने के लिए सरोगेट अपने पैसे लौटाने को तैयार हो गईं. वे पैसे, जिससे उनके असल बच्चे पलने वाले थे.
उत्तराखंड की एक सरोगेट से मेरी बात कराई गई.
6 साल की बेटी की मां कहती है- कई लाख का कर्जा चढ़ चुका था, तब पति खुद सरोगेसी का आइडिया लेकर आए. 'तुम्हें कुछ नहीं करना. बढ़िया से घर में रहोगी. मन का खाओगी और कई लाख भी मिलेंगे. बीच-बीच में बेटी को मिलाने लाता रहूंगा.'
फिर! कोई कॉन्ट्रैक्ट हुआ होगा आपका उन पेरेंट्स के साथ?

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