
Exclusive: केंद्र में मंत्री या मुख्यमंत्री, कौन-सा पद है जरूरी? जानें क्या बोले शिवराज सिंह चौहान
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5 बार के सांसद और 3 बार मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह एक बार फिर केंद्र की राजनीति में उतरने जा रहे हैं. बीजेपी ने उनको विदिशा से उम्मीदवार बनाया है. इस कड़ी में ट्रेन में सफर करने पहुंचे शिवराज सिंह चौहान से आजतक ने खास बातचीत की. उन्होंने बताया कि पार्टी ने आदेश दिया है कि लोकसभा का चुनाव लड़ो तो वह चुनाव लड़ रहे हैं.
लोकसभा चुनाव में कुछ ही समय बचा है. तारीखों का ऐलान हो चुका है और आचार सहिंता भी लागू हो चुकी है. एक तरफ बीजेपी ने 400+ का नारा दिया है तो वहीं INDIA गठबंधन नरेंद्र मोदी के विजय रथ को रोकने की कोशिशों में जुटी है. इस सबके बीच मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को भोपाल से एक ट्रेन में सफर किया और पार्टी कार्यकर्ताओं से भी संवाद किया.
दरअसल, 5 बार के सांसद और 3 बार मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह एक बार फिर केंद्र की राजनीति में उतरने जा रहे हैं. बीजेपी ने उनको विदिशा से उम्मीदवार बनाया है. इस कड़ी में ट्रेन में सफर करने पहुंचे शिवराज सिंह चौहान से आजतक ने खास बातचीत की. उन्होंने बताया कि पार्टी ने आदेश दिया है कि लोकसभा का चुनाव लड़ो तो वह चुनाव लड़ रहे हैं. पार्टी तय करती है क्या करना है और वह अब भी वही कर रहे हैं.
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मेरी जिंदगी के मिशन है जनता और देश की सेवा का. माध्यम है भारतीय जनता पार्टी. बीजेपी राष्ट्रीय पुनर्निर्माण का आंदोलन है. जब आप एक मिशन में रहते हैं तो आप ये तय नहीं करते कि आप कहां रहेंगे. मिशन ये तय करता है कि आप कहां रहेंगे और कहां काम करेंगे. हम आत्मकेंद्रित राजनीति नहीं करते. हमारी पार्टी औऱ हमारा मिशन जो काम देता है वो पूरी प्रमाणिकता के साथ करते हैं.
उन्होंने कहा कि जब पार्टी ने जो जिम्मेदारी दी, पहले विधायक बना, फिर सांसद रहा, मुख्यमंत्री रहा. जो जिम्मेदारी दी मेहनत से पूरी की. पार्टी ने आदेश दिया है कि फिर लोकसभा का चुनाव लड़ूं तो लोकसभा लड़ रहे हैं. हम अपने बारे में नहीं सोचते, देश के बारे में सोचते हैं और पार्टी तय करती है हम कहां काम करेंगे.
काम का माध्यम है राजनीति: शिवराज
केंद्र में मंत्री बनना या मुख्यमंत्री, कौन सा पद है जरूरी? इस सवाल के जवाब में शिवराज सिंह ने कहा कि काम का माध्यम है राजनीति. आप राष्ट्रीय राजनीति में रहते हुए भी बहन-बेटियों के लिए काम कर सकते हैं. बच्चों के लिए, किसानों के लिए, गरीबों के लिए काम कर सकते हैं. जो पार्टी ने तय कर दिया है, वो करते जाना है. बहन और बेटियों के लिए काम करना मेरे लिए बचपन से एक मिशन रहा है. क्योंकि मैंने मां और बहन-बेटियों के साथ अपने गांव और अपने क्षेत्र में अन्याय होते देखा है.

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