
Drugs in India: 3.1 करोड़ को गांजे की लत, हर दिन 21 मौतें, जानें कितनी बड़ी है भारत में ड्रग्स की समस्या?
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हमारे देश में हर दिन 21 लोग ड्रग की लत से परेशान होकर आत्महत्या कर लेते हैं. ये आंकड़े एनसीआरबी के हैं. 2019 में देशभर में 7 हजार 800 से ज्यादा लोगों ने ड्रग की लत से परेशान होकर आत्महत्या कर ली थी.
देश में ड्रग्स की चर्चा एक बार फिर शुरू हो गई है. कारण है मुंबई से गोवा जा रहे क्रूज में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) का छापा. एनसीबी ने यहां छापा मारकर हाईप्रोफाइल ड्रग्स पार्टी का भंडाफोड़ कर दिया. एक साल बाद फिर से एक बार बॉलीवुड का ड्रग्स कनेक्शन भी सामने आ रहा है. वो इसलिए क्योंकि इस मामले में बॉलीवुड स्टार शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को गिरफ्तार कर लिया गया है. आर्यन भी इस क्रूज पर मौजूद थे.

7 राज्य, 26 ठिकाने और ED का एक्शन... इंटरस्टेट ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़, PMLA के तहत चल रही है जांच
ED ने PMLA के तहत गोवा समेत 7 राज्यों में मौजूद 26 ठिकानों पर छापेमारी की और इंटरस्टेट ड्रग तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग सिंडिकेट का पर्दाफाश कर दिया. यह एक बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है. पढ़ें इस मामले की पूरी कहानी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि पंचायत से पार्लियमामेंट तक जनता का विश्वास बीजेपी के साथ है. इसी विश्वास की नई किस्त महाराष्ट्र से आई है. देश में लगातार तीन बार मोदी सरकार. देश के बीस राज्यों में NDA की सरकार. केरल तक में बीजेपी की जीत. तिरुवनंतपुरम नगर निगम चुनाव में कमल खिलने के बाद आज महाराष्ट्र में भी नया इतिहास रचा गया है.

आज के बीएमसी चुनाव में भाजपा ने मुम्बई में बड़ी सफलता हासिल की है. पिछले चालीस वर्षों में पहली बार भाजपा बीएमसी की मेयर की कुर्सी संभालने को तैयार है. भाजपा ने विकास कार्यों को अपनी प्राथमिकता बनाया है और जनता ने इसे स्वीकार किया है. चुनाव की मतगणना अभी चल रही है, लेकिन शुरुआती रुझान साफ दिखा रहे हैं कि भाजपा और उसके गठबंधन को भारी बहुमत मिलेगा. विपक्ष खासकर शिवसेना के लिए यह चुनाव चुनौतीपूर्ण रहा है. उद्धव ठाकरे की पार्टी को कुछ सीटें मिली हैं पर भाजपा की बढ़त स्पष्ट है.

बीएमसी चुनाव में बीजेपी-शिवसेना शिंदे गुट का गठबंधन आगे चल रहा है. ठाकरे बंधुओं और एनसीपी-एसपी का गठबंधन भी 80 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. Axis My India के एमडी प्रदीप गुप्ता ने कहा है कि हार के बावजूद ठाकरे बंधु मराठी बहुल इलाकों, खासकर ग्रेटर मुंबई में अपनी साख बचाने में कामयाब रहे हैं. हार के बावजूद उनके वजूद पर सवाल नहीं उठाए जा सकते.









