
Digital Arrest: दिल्ली के डॉक्टर कपल से 15 दिन में 15 करोड़ की ठगी, 4 दिन बाद भी खाली हाथ पुलिस
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दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में रहने वाले एक बुजुर्ग दंपत्ति से करीब 15 करोड़ रुपए की ठगी के मामले में पुलिस के हाथ अब भी खाली हैं. वारदात के चार दिन बीत जाने के बाद भी न तो कोई गिरफ्तारी हुई है और न ही रकम की रिकवरी. ठगों ने बुजुर्गों को दो हफ्ते तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर उनकी जीवन भर की जमापूंजी लूट ली.
दिल्ली के बेहद पॉश इलाके ग्रेटर कैलाश में हुई 15 करोड़ रुपए की सनसनीखेज साइबर ठगी ने पुलिस की नींद उड़ा दी है. 81 साल के डॉक्टर ओम तनेजा और उनकी 77 साल की पत्नी डॉक्टर इंदिरा तनेजा से 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर हुई इस महाठगी के 4 दिन बाद भी दिल्ली पुलिस को कोई बड़ी कामयाबी नहीं मिली है. आखिरी बेनिफिशियरी तक पहुंचने में पुलिस को पसीने छूट रहे हैं.
यह पूरी वारदात किसी थ्रिलर फिल्म जैसी है. साइबर ठगों ने 24 दिसंबर को इस बुजुर्ग कपल को अपने जाल में फंसाया और 9 जनवरी तक उन्हें 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा. इस दौरान ठगों ने खुद को टेलीकॉम और कानून प्रवर्तन एजेंसियों का अधिकारी बताकर कपल पर भारी मानसिक दबाव बनाया. उन्हें गिरफ्तारी की धमकी दी गई और लगातार ऑडियो-वीडियो कॉल के जरिए निगरानी में रखा गया.
डर के मारे पीड़ित कपल ने 2-2 करोड़ रुपए की किस्तों में कुल आठ बार ट्रांजेक्शन किए. यहां तक कि ठगों ने उनके म्यूचुअल फंड भी समय से पहले बिकवा दिए. दिल्ली पुलिस के एक सीनियर ऑफिसर ने बताया कि इस केस की जांच बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है. ठगों ने लूटी गई रकम को छिपाने के लिए बड़ी संख्या में 'म्यूल' बैंक अकाउंट्स का इस्तेमाल किया है.
ये वो खाते होते हैं जो कमीशन के लालच में मासूम या अनजान लोगों से किराए पर लिए जाते हैं. पैसा खाते में आते ही उसे तुरंत कई अन्य अकाउंट्स में भेज दिया जाता है या क्रिप्टोकरेंसी में बदल दिया जाता है. इस उलझे हुए 'मनी ट्रेल' को ट्रैक करने के लिए पुलिस की दो स्पेशल टीमें बनाई गई हैं. पीड़ित ओम तनेजा कई दशकों तक अमेरिका में काम करने के बाद 2016 में भारत लौटे थे.
उनके बच्चे विदेश में सेटल हैं और वे यहां अकेले रहते थे, जिसका ठगों ने फायदा उठाया. डॉक्टर तनेजा ने बताया, "हमने अपनी जिंदगी की पूरी सेविंग्स खो दी है. हमारी सबसे बड़ी गलती यह थी कि हमने पुलिस को पहले सूचना नहीं दी." फिलहाल दिल्ली पुलिस की साइबर यूनिट (IFSO) ने ई-एफआईआर दर्ज कर ली है और संदिग्धों की तलाश में छापेमारी कर रही है.
पुलिस के मुताबिक, साइबर अपराधी अक्सर सोशल मीडिया पर फर्जी जॉब ऑफर या इन्वेस्टमेंट स्कीम का झांसा देकर लोगों को 'म्यूल' के तौर पर भर्ती करते हैं. इसके बाद उनके खातों का इस्तेमाल अवैध फंड को इधर-उधर करने में किया जाता है. इस मामले में भी पैसे को इतनी तेजी से अलग-अलग राज्यों के खातों में घुमाया गया है कि आखिरी छोर तक पहुंचने में समस्या आ रही है.

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