
Chaitra Navratri 2023: नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती के पाठ से बदलेगा भाग्य, जानें क्या हैं इसके नियम
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Durga Saptshati: ज्योतिषी कहते हैं कि नवरात्रि के इन पावन दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ परम फलदायी, कल्याणकारी और शुभकारी है. दुर्गा सप्तशती एक ऐसा ग्रंथ है, जिसमें देवी दुर्गा की महिषासुर नामक राक्षस के ऊपर विजय का वर्णन किया गया है.
Chaitra Navratri 2023: दुर्गा सप्तशती एक ऐसा स्त्रोत है, जिसके हर अध्याय का खास और अलग उद्देश्य होता है. सप्तशती का पाठ एक कल्याणकारी कवच की तरह है. ज्योतिषी कहते हैं कि नवरात्रि के इन पावन दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ परम फलदायी, कल्याणकारी और शुभकारी है. दुर्गा सप्तशती एक ऐसा ग्रंथ है, जिसमें देवी दुर्गा की महिषासुर नामक राक्षस के ऊपर विजय का वर्णन किया गया है. आइए आज आपको दुर्गा सप्तशती का महत्व और लाभ विस्तार से बताते हैं.
क्या है दुर्गा सप्तशती? दुर्गा सप्तशती में देवी की आराधना के लिए तमाम मंत्रों, स्तोत्रों और साधना विधि का उल्लेख किया गया है. लेकिन सर्वाधिक मान्यता प्राप्त और अचूक स्तोत्र दुर्गा सप्तशती माना जाता है. मार्कंडेय ऋषि ने इसकी रचना की थी. इसका एक-एक श्लोक महामंत्र है. ऐसा कहते हैं कि दुर्गा सप्तशती बिना नियमों की जानकारी के नहीं पढ़ना चाहिए.
दुर्गा सप्तशती के 13 अध्याय हैं. इसमें कुल 700 श्लोक हैं. ये 700 श्लोक तीन भागों में बांटे गए हैं- प्रथम चरित्र , मध्यम चरित्र और उत्तम चरित्र. दुर्गा सप्तशती पाठ के श्लोकों का असर निश्चित रूप से होता है. दरअसल सप्तशती में शक्ति प्राप्ति और प्रयोग का अद्भुत विज्ञान है. कहते हैं कि दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से सभी प्रकार की सिद्धियां पाई जा सकती हैं.
दुर्गा सप्तशती के मंत्र जाप नियम पहले अपनी इच्छानुसार मंत्र का चुनाव करें. नवरात्र में मंत्र जाप की शुरुआत करें. कम से कम रोज तीन माला मंत्र जाप करें और लगातार नौ दिनों तक मंत्र जाप करें. सप्तशती के पाठ के पहले उत्कीलन मंत्र का जरूर जाप करें. चाहें तो उत्कीलन मंत्र के बाद कवच, अर्गला और कीलक का पाठ भी कर सकते हैं. सप्तशती का पूर्ण फल लेने के लिए लाल वस्त्र धारण करके इसका पाठ करें. इस दौरान सात्विक रहें. अगर उपवास रखें तो और भी उत्तम होगा. मंत्र जाप लाल चन्दन या रुद्राक्ष की माला से करें.
कैसे करें पाठ? सप्तशती का पाठ किसी भी समय कर सकते हैं, लेकिन नवरात्रि में इसका पाठ करना सर्वोत्तम होता है. देवी के समक्ष घी का दीपक जलाएं. उन्हें लाल पुष्प अर्पित करें. इसके बाद नियम पूर्वक सप्तशती का पाठ करें. आप जितने दिन भी सप्तशती का पाठ करें, उतने दिन सात्विकता बनाए रखें.
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