
BJP विधायक से दुश्मनी, AK-47 कांड... माफिया डॉन मुख्तार अंसारी की पूरी कहानी, जिसमें हुई 10 साल की कैद
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बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी को साल 1996 में दर्ज गैंगस्टर मामले में कोर्ट ने दोषी करार देते हुए 10 साल की सजा का ऐलान किया है. मुख्तार अंसारी के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत केस दर्ज थे. दो मामले गाजीपुर तो दो वाराणसी और एक चंदौली में दर्ज था. गाजीपुर एमपी-एमएलए कोर्ट ने दोषी करार देते हुए 10 साल की सजा सुनाई है. कोर्ट ने 5 लाख का जुर्माना भी लगाया है.
उत्तर प्रदेश के माफिया डॉन मुख्तार अंसारी को गैंगस्टर केस में गाजीपुर एमपी-एमएलए कोर्ट ने दोषी करार दिया है. इसको लेकर कोर्ट ने 10 साल की सजा के साथ ही 5 लाख का जुर्माना भी लगाया है. मुख्तार अंसारी पर गैंग्स्टर एक्ट के तहत दर्ज मामले में फैसला सुनाया गया है. गाजीपुर की MP/MLA कोर्ट से 15 अप्रैल को ये फैसला होना था, लेकिन उस दिन सजा का एलान नहीं हो पाया था.
साल 2007 में मुख्तार अंसारी और अफजाल अंसारी पर गैंगस्टर एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ था. अब करीब 16 साल बाद इस मामले में फैसला आया है. बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या और एक कोयला व्यापारी के अपहरण केस के बाद दोनों भाइयों पर गैंगस्टर एक्ट लगा था.
बीजेपी विधायक से थी पुरानी अदावत
सियासी अदावत से ही मुख्तार अंसारी का नाम बड़ा हुआ और वो साल था 2002, जिसने मुख्तार की जिंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया. इसी साल बीजेपी के विधायक कृष्णानंद राय ने अंसारी परिवार के पास साल 1985 से रही गाजीपुर की मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट छीन ली. कृष्णानंद राय विधायक के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके और तीन साल बाद यानी साल 2005 में उनकी हत्या कर दी गई थी.
कृष्णानंद राय हत्याकांड में आया था नाम
कृष्णानंद राय एक कार्यक्रम का उद्घाटन करके लौट रहे थे, तभी उनकी गाड़ी को चारों तरफ से घेर कर अंधाधुंध फायरिंग की गई थी. हमला ऐसी सड़क पर हुआ, जहां से गाड़ी को दाएं-बाएं मोड़ने का कोई रास्ता नहीं था. हमलावरों ने AK-47 से अंधाधुंध गोलियां चलाईं और कृष्णानंद राय समेत गाड़ी में मौजूद सभी सातों लोग मारे गए थे.

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