
Bihar: लोकपाल कार्यालय में मुखिया की दबंगई, अधिकारियों के सामने बाप-बेटे को पीटा
AajTak
भागलपुर में लोकपाल कार्यालय में एक शिकायतकर्ता बाप-बेटे को दबंग मुखिया ने जमकर पीटा. दरअसल, मधुबनी पंचायत के मुखिया अजित कुमार सिंह के खिलाफ अमरेंद्र कुमार और उसके बेटे बृजेश कुमार ने शिकायत की थी. इसको लेकर सुनवाई थी. इस दौरान दोनों में झड़प हो गई और मुखिया ने बाप-बेटे को पीटकर घायल कर दिया.
बिहार के भागलपुर में लोकपाल कार्यालय में एक शिकायतकर्ता बाप-बेटे को दबंग मुखिया ने जमकर पीटा. मामला भागलपुर समाहरणालय स्थित लोकपाल कार्यालय का है. यहां मनरेगा में करीब 63 लाख रुपये का कथित घोटाला सामने आया. इसमें मदरौनी पंचायत के मुखिया अजित कुमार सिंह उर्फ मुन्ना के खिलाफ गांव के एक ही परिवार के बाप-बेटे ने शिकायत दी थी.
इस मामले की शनिवार को सुनवाई थी. इस दौरान मुखिया और शिकायतकर्ता में बहस शुरू हो गई. लोकपाल के सामने दबंग मुखिया ने बाप-बेटे को बुरी तरह मारकर घायल कर दिया. इसको लेकर लोकपाल कार्यालय से पुलिस को सूचना दी गई. पुलिस बाप-बेटे और मुखिया को थाने ले गई. बाप-बेटे को इलाज के लिए भेज दिया. दूसरी ओर मुखिया ने भी थाने में लिखित शिकायत दी है. पुलिस मामले की जांच कर रही है.
हम लोग काफी डरे और असुरक्षित हैं- लोकपाल
इस मामले में लोकपाल आलोक मिश्रा का कहना है कि मधुबनी पंचायत के मुखिया अजित कुमार सिंह के खिलाफ अमरेंद्र कुमार और उसके बेटे बृजेश कुमार ने शिकायत की थी. इसको लेकर सुनवाई थी. इस दौरान दोनों में झड़प हो गई और मुखिया ने बाप-बेटे को पीटकर घायल कर दिया. हम लोग काफी डरे और असुरक्षित हैं.
कभी भी बड़ी घटना घट सकती है- आलोक मिश्रा
इससे पहले हमने जिलाधिकारी और अन्य अधिकारियों को सुरक्षा को लेकर आवेदन भी दिया है. मगर, अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई. सुरक्षा का इंतजाम नहीं किया गया तो कभी भी बड़ी घटना घट सकती है. शिकायत करने वाले अमरेंद्र कुमार और बृजेश कुमार ने कहा कि मुखिया काफी दबंग है. वो किसी की बात नहीं सुनता. उसके खिलाफ जो भी आवाज उठाता है, उसे काफी प्रताड़ित करता है.

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

संभल में दंगा मामले के बाद सीजेएम के तबादले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इस पर सीजेएम का अचानक तबादला हुआ और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. इस विवाद में राजनीतिक सियासत भी जुड़ी है. हाई कोर्ट के आदेशानुसार जजों के ट्रांसफर होते हैं लेकिन इस बार बहस हुई कि क्या यहां राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया.

दावोस में भारत वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना करने और एक बेहतर भविष्य बनाने के लिए पूरी तैयारी कर रहा है. इस संदर्भ में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से खास बातचीत की गई जिसमें उन्होंने बताया कि AI को लेकर भारत की क्या योजना और दृष्टिकोण है. भारत ने तकनीकी विकास तथा नवाचार में तेजी लाई है ताकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रह सके. देखिए.

महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों के बाद ठाणे जिले के मुंब्रा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. एमआईएम के टिकट पर साढ़े पांच हजार से अधिक वोट के अंतर से जीत हासिल करने वाली सहर शेख एक बयान की वजह से चर्चा में हैं. जैसे ही उनका बयान विवादास्पद हुआ, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका बयान धार्मिक राजनीति से जुड़ा नहीं था. सहर शेख ने यह भी कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है और वे उस तरह की राजनीति का समर्थन नहीं करतीं.








