
दिल्ली के रूप नगर में बड़ा हादसा: 33 साल पुराना लोहे का पुल ढहने से एक महिला की मौत, 48 घंटे में मांगी गई रिपोर्ट
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दिल्ली के रूप नगर में 33 साल पुराना लोहे का फुट ओवरब्रिज मंगलवार सुबह गिर गया, जिसमें एक महिला की जान चली गई. यह पुल पहले से ही असुरक्षित घोषित था और जुलाई 2025 से बंद था, फिर भी लोग इसका इस्तेमाल कर रहे थे. सिंचाई मंत्री परवेश साहिब सिंह ने हादसे की जांच के लिए 3 सदस्यों की कमेटी बनाई है और 48 घंटे में रिपोर्ट मांगी है. साथ ही दिल्ली के सभी पुराने पुलों की जांच के आदेश दिए गए हैं.
राजधानी दिल्ली के रूप नगर इलाके से मंगलवार सुबह एक बेहद दुखद खबर आई. यहां मदर डेयरी के पास नजफगढ़ नाले पर बना लोहे का एक फुट ओवरब्रिज अचानक गिर गया. यह हादसा उस वक्त हुआ जब इलाके के लोग अपनी डेली रूटीन की जिंदगी में व्यस्त थे. लोहे का भारी-भरकम ढांचा ढहते ही चारों तरफ चीख-पुकार मच गई. हादसे के वक्त एक महिला पुल पार कर रही थी, जो सीधे नाले के गहरे और गंदे पानी में जा गिरी.
खबर मिलते ही दिल्ली पुलिस, फायर ब्रिगेड और NDRF( राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल) की टीमें मौके पर पहुंचीं. रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ और काफी मशक्कत के बाद उस महिला को नाले से बाहर निकाला गया. डॉक्टरों और बचाव दल ने अपनी पूरी जान लगा दी, लेकिन अफसोस कि उस महिला की जान नहीं बचाई जा सकी. इस घटना ने एक बार फिर दिल्ली में पुराने और जर्जर हो चुके ढांचों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह पुल करीब 33 साल पुराना था और सालों से धूप-बारिश झेलते-झेलते यह अंदर से पूरी तरह गल चुका था.
हैरानी की बात यह है कि प्रशासन को इस खतरे का अंदाजा पहले से था. इसी साल मार्च 2025 में जब इसका मुआयना किया गया, तो इंजीनियरों ने इसे असुरक्षित घोषित कर दिया था. इसके बाद जुलाई में कागजों पर तो पुल को आम जनता के लिए बंद कर दिया गया और पाबंदियां भी लगाई गईं, लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और थी. लोग अपनी सुविधा के लिए जान जोखिम में डालकर इस टूटे-फूटे पुल का इस्तेमाल कर ही रहे थे. सवाल यह उठता है कि अगर पुल खतरनाक था, तो उसे पूरी तरह से ब्लॉक क्यों नहीं किया गया या उसे तुरंत तोड़ा क्यों नहीं गया? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा था?
'48 घंटे में बताओ जिम्मेदार कौन'
हादसे की खबर मिलते ही दिल्ली के सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण मंत्री परवेश साहिब सिंह ने गहरी चिंता जताई. उन्होंने साफ कहा कि यह एक बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना है और इसे टाला जा सकता था. मंत्री ने तुरंत कार्रवाई करते हुए तीन अधिकारियों की एक कमेटी बना दी है. इस कमेटी को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि अगले 48 घंटों के भीतर हादसे की पूरी रिपोर्ट मेज पर होनी चाहिए. जांच इस बात पर होगी कि आखिर पुल गिरा कैसे और अगर यह बंद था, तो लोग इस पर जा कैसे रहे थे?
परवेश सिंह ने कड़े लहजे में कहा, 'हमने जांच के आदेश दे दिए हैं. ढांचा क्यों गिरा और इसके पीछे किसकी लापरवाही है, यह सब साफ किया जाएगा. जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर कड़ी कार्रवाई होगी.' इसके साथ ही सरकार ने अब दिल्ली के सभी पुराने लोहे के फुट ओवरब्रिजों का सेफ्टी ऑडिट करने का फैसला किया है. यानी अब पूरी दिल्ली में ऐसे जितने भी पुल हैं, उनकी जांच होगी ताकि दोबारा किसी परिवार को अपना सदस्य न खोना पड़े.

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