
पहले LPG संकट और अब बिजली... नैनीताल के 80 हजार लोग हो रहे परेशान
AajTak
नैनीताल में तूफान और ओलावृष्टि से बिजली व्यवस्था दो दिन तक ठप रही, जिससे 80 हजार लोग प्रभावित हुए. इसी बीच गहराते एलपीजी संकट ने हालात और बिगाड़ दिए हैं. गैस की कमी के चलते होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट बंद होने लगे हैं, जिससे पर्यटन और स्थानीय कारोबार पर बड़ा असर पड़ा है. बिजली बहाल होने के बाद भी शहर पूरी तरह पटरी पर नहीं लौट पाया है और रोजगार को लेकर चिंता बढ़ गई है.
पहाड़ों का खूबसूरत शहर नैनीताल की रफ्तार इन दिनों जैसे थम सी गई है. एक तरफ जहां रसोई गैस का गहराता संकट लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को मुश्किल बना रहा है, तो दूसरी तरफ हाल ही में आई भीषण आंधी-तूफान और ओलावृष्टि ने बिजली व्यवस्था को ऐसा झटका दिया कि पूरे शहर दो दिन से परेशान है. हालात ऐसे बने कि विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल में जिंदगी जैसे ठहर गई हो.
अधिकारियों ने बताया कि तेज तूफान और भारी ओलावृष्टि के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ उखड़ गए, जिससे बिजली की कई लाइनें क्षतिग्रस्त हो गईं. इसका असर यह हुआ कि शहर और आसपास के इलाकों में करीब 48 घंटे तक बिजली आपूर्ति ठप रही. यह सिर्फ एक तकनीकी समस्या नहीं थी, बल्कि इसका असर सीधे आम लोगों के जीवन, कारोबार और प्रशासनिक कामकाज पर भी पड़ा. बिजली गुल होते ही शहर की रफ्तार अचानक धीमी पड़ गई. घरों में अंधेरा छा गया, पानी की सप्लाई प्रभावित हुई और मोबाइल नेटवर्क तक लड़खड़ाने लगा. पर्यटकों से भरे इस शहर में होटल और गेस्ट हाउसों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. कई जगहों पर जनरेटर भी जवाब दे गए, जिससे मेहमानों को असुविधा झेलनी पड़ी.
न्यूज एजेंसी के मुताबिक इस संकट का सबसे ज्यादा असर नैनीताल और उसके आसपास के इलाकों जैसे पदमपुरी, ओखलकांडा, सुखाताल और पाइन्स में रहने वाली करीब 80 हजार की आबादी पर पड़ा. स्थानीय लोग बताते हैं कि दो दिन तक बिजली नहीं रहने से बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों की देखभाल और दैनिक कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुए. स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बिजली विभाग को इस प्राकृतिक आपदा से लगभग 50 से 60 लाख रुपये का नुकसान हुआ है.
अधिकारियों ने बताई प्राथमिकता
उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन की टीमें खराब मौसम और दुर्गम इलाकों के बावजूद लगातार काम में जुटी रहीं. कई जगहों पर पेड़ हटाकर और टूटी लाइनों को जोड़कर सप्लाई बहाल करने की कोशिश की गई. कुमाऊं जोन के मुख्य अभियंता राजेंद्र गुंज्याल ने बताया कि बिजली बहाल करना विभाग की पहली प्राथमिकता थी और इसी पर पूरा फोकस रखा गया. उन्होंने यह भी कहा कि तूफान से हुए अन्य नुकसान का आकलन बाद में किया जाएगा. सुबह जैसे ही बिजली सप्लाई बहाल हुई, लोगों ने राहत की सांस ली. हालांकि जनजीवन पूरी तरह पटरी पर आने में अभी थोड़ा समय लग रहा है. लेकिन इस राहत के बीच एक और बड़ा संकट शहर के सामने खड़ा है वो है एलपीजी की कमी.
दरअसल, पिछले कुछ समय से नैनीताल गैस सप्लाई की गंभीर समस्या से जूझ रहा है. घरेलू और कमर्शियल दोनों तरह के गैस सिलेंडरों की आपूर्ति प्रभावित होने से शहर की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ रहा है. खासकर मल्लीताल क्षेत्र में इसका असर साफ दिखाई दे रहा है, जहां कई रेस्टोरेंट, ढाबे और छोटी खानपान की दुकानें गैस न मिलने के कारण बंद हो चुकी हैं. पर्यटन सीजन से ठीक पहले इस तरह का संकट स्थानीय कारोबारियों के लिए किसी झटके से कम नहीं है. होटल और रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि अगर जल्द ही गैस की आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो उन्हें अपने प्रतिष्ठान पूरी तरह बंद करने पड़ सकते हैं. इससे न सिर्फ उनका नुकसान होगा, बल्कि उन सैकड़ों कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर भी संकट खड़ा हो जाएगा जो इन पर निर्भर हैं.

पिछले 18 दिनों से अमेरिका, इजरायल और ईरान के युद्ध का मोर्चा खुला हुआ है. और उधर पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के साथ जंग का एक और फ्रंट खोल दिया है. बीती रात पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक करके एक अस्पताल के 400 मरीज मार डाले. पाकिस्तान को ये लग रहा है कि जब दुनिया का ध्यान ईरान पर है तो वो अफगानिस्तान में कत्लेआम मचा सकता है. और वो इससे बच जाएगा. लेकिन ऐसा होगा नहीं. क्योंकि अब तालिबान ने भी अपने निर्दोष नागरिकों की हत्या का बदला लेना की कसम खा ली है.

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया कि इजरायल ने ईरान के अली लारिजानी और बसीज कमांडर को मार गिराया है. उन्होंने कहा कि इन हमलों का मकसद ईरान की व्यवस्था को कमजोर करना है. नेतन्याहू के अनुसार, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मिलकर सैन्य सहयोग जारी है और आगे भी कई बड़ी योजनाएं तैयार हैं.











