
31.46 ट्रिलियन डॉलर... अमेरिका पर इतना कर्ज कैसे बढ़ गया? डिफॉल्ट होने से बचने का रास्ता क्या है?
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जब से अमेरिका नया मुल्क बना है, तब से ही उस पर कर्जा बढ़ता रहा है. कोविड महामारी से पहले अमेरिका पर 22.7 ट्रिलियन डॉलर का कर्जा था. यानी, तीन साल में ही ये कर्ज लगभग 10 ट्रिलियन डॉलर बढ़ गया है.
- अमेरिका पर कुल कर्ज बढ़कर 31.46 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया है. - हर अमेरिकी नागरिक पर इस समय कुल करीब 94 हजार डॉलर का कर्ज है. - अमेरिका हर दिन कर्ज पर ब्याज चुकाने में 1.3 अरब डॉलर खर्च कर रहा है.
ये तीन आंकड़े अमेरिकी अर्थव्यवस्था की कहानी बयां करते हैं. अमेरिका डिफॉल्ट होने की कगार पर है. ये कर्ज बढ़ता ही जा रहा है.
इस समय अमेरिका पर कुल कर्ज बढ़कर 31.46 ट्रिलियन डॉलर हो गया है. भारतीय करंसी के हिसाब से ये कर्ज 260 लाख करोड़ रुपये होता है. कोविड महामारी से पहले अमेरिका पर 22.7 ट्रिलियन डॉलर का कर्जा था. यानी, तीन साल में ही ये कर्ज लगभग 10 ट्रिलियन डॉलर बढ़ गया है.
अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी जेनेट येलेन ने चेताया है कि अगर सरकार ने कर्ज लेना की सीमा यानी डेट सीलिंग नहीं बढ़ाई तो 1 जून से नकदी का संकट खड़ा हो जाएगा.
डेट सीलिंग बढ़ाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने रिपब्लिकन नेता केविन मैक्कार्थी से बात बात भी की थी. लेकिन ये बातचीत बेनतीजा ही रही. डेट सीलिंग यानी कर्ज लेने की सीमा बढ़ाने के लिए बाइडेन सरकार के पास कुछ ही दिन बचे हैं.
दरअसल, अमेरिका में कर्ज लेने की एक सीमा तय है. इसे ही डेट सीलिंग कहा जाता है. और नया कर्ज लेने के लिए संसद से बिल पास कराना होगा. लेकिन दिक्कत ये है कि बाइडेन डेमोक्रेट हैं और जहां से बिल पास होगा, वहां रिपब्लिकन बहुमत में हैं. कुल मिलाकर बाइडेन सरकार को कुछ न कुछ हल निकालना होगा, वरना नए पेमेंट के लिए पैसा नहीं होगा. अगर ऐसा हुआ, तो तकनीकी तौर पर अमेरिका डिफॉल्ट या डिफॉल्ट माना जाएगा.

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ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

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