
27 दिन, 15 हत्याएं, गांव-गांव खौफ का साम्राज्य... पश्चिम बंगाल की चुनावी हिंसा का 'रक्तचरित्र'!
AajTak
पश्चिम बंगाल में जिस दिन पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान हुआ है, तब से अब तक कम से कम 15 लोगों की हत्या हो चुकी है. पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा का एक लंबा इतिहास रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर यहां हर बार चुनाव के दौरान हिंसा क्यों भड़क जाती है?
पश्चिम बंगाल में हो रहे पंचायत चुनावों में इस बार भी सत्ता के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए खून-खराबा किया जाने लगा है.
बुधवार को ही उत्तर 24 परगना में बम हमले में एक नाबालिग की मौत हो गई है. बताया जा रहा है कि 17 साल का इमरान हुसैन मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस की रैली में शामिल हुआ था. इससे पहले दक्षिण 24 परगना जिले में भी टीएमसी कार्यकर्ता जियारूल मोहल्ला नाम के शख्स की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
वहीं, दो जुलाई को मुर्शिदाबाद जिले में रविवार रात कांग्रेस कार्यकर्ता आरिफ शेख को भी गोली मार दी गई थी. इस हमले में आरिफ शेख बुरी तरह जख्मी हो गए थे. सोमवार को पुरुलिया में 45 साल के बीजेपी कार्यकर्ता का शव खेतों में मिला था.
रिपोर्ट्स बतातीं हैं कि बंगाल में जिस दिन से पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान हुआ है, तब से अब तक 15 लोगों की हत्या हो चुकी है. बंगाल में पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान 8 जून को हुआ था.
पश्चिम बंगाल में 74 हजार से ज्यादा जिला परिषद, पंचायत समिति और ग्राम पंचायत में वोटिंग होनी है. ये वोटिंग 8 जुलाई को होगी, जबकि 11 जुलाई को नतीजे आएंगे.
पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव हो या विधानसभा चुनाव हो या फिर लोकसभा चुनाव... हिंसा होती ही है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर यहां चुनावों के दौरान हिंसा क्यों भड़क जाती है?

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.










