
युवराज मेहता डेथ केस को ड्रिंक एंड ड्राइव बताने की घिनौनी कोशिश क्यों हो रही है
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जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.
नोएडा सेक्टर 150 में 16 जनवरी 2026 की रात हुई वो दिल दहलाने वाली घटना अब एक घिनौने कवर-अप की शक्ल ले चुकी है. 27 साल का सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता, जो गुरुग्राम से घर लौट रहा था, घने कोहरे में एक निर्माणाधीन मॉल (रुके हुए प्रोजेक्ट) के खुले गड्ढे में गिर गया. 80-90 मिनट तक वो कार की छत पर चढ़कर चीखता रहा, पापा, मुझे बचा लो! लेकिन पुलिस, फायर ब्रिगेड और SDRF के 80 से ज्यादा लोग तमाशा देखते रहे. एक बाप के सामने उसका बेटा जिंदगी की भीख मांगता रहा और प्रशासन कुछ न करने के बहाने ढूढता रहा.
9 हजार करोड़ के बजट वाला यह शहर प्रति व्यक्ति के हिसाब से देश का सबसे अमीर शहर हो सकता है. पर नवधनाड्यों के इस शहर के सरकारी तंत्र के पास न कोई रेस्क्यू उपकरण नहीं था और न ही काम करने की जद्दोजहद. पोस्टमार्टम में मौत का कारण डूबना, हार्ट अटैक और हाइपोथर्मिया बताया गया, लेकिन अब नोएडा प्रशासन इस मौत को युवराज की शराबनोशी के बाद गाड़ी चलाने का आरोप लगाकर हल्का करने की कोशिश कर रही है. सवाल उठता है कि जिस जिले की कमान दो महिलाओं ( जिलाधिकारी- मेधा रूपम और पुलिस कमिश्नर- लक्ष्मी सिंह) के हाथ में वहां कैसे इस तरह की असंवेदनशीलता को बर्दाश्त किया जा रहा है.
कवर-अप की घिनौनी चाल?
गुरुग्राम पब का फुटेज लीक करके, बिल दिखाकर और गवाहों को धमकाकर कब तक सच्चाई दफनाई जाएगी . कब तक प्रत्यक्षदर्शियों की आवाज को बंद करने की कोशिश की जाएगी. युवराज की मौत के पहले 3 घंटे की डिटेल निकालने में कितनी मेहनत हुई होगी. गुड़गांव से लेकर नोएडा तक हजारों सीसीटीवी की फुटेज खंगालने के लिए कितने कर्मचारियों को लगाया गया होगा. इतनी मेहनत यह पताने लगाने के लिए भी किया जा सकता था कि कौन से कर्मचारी और अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर कौन सा बहाना बनाया, इन कर्मचारियों को इस काम के लिए भी लगाया जा सकता था कि सेक्टर 150 के आसपास और कितने मौत के तालाब बने हुए हैं. इन कर्मचारियों को यह पता लगाने के लिए भी लगाया जा सकता था कि बिल्डर ने किन अधिकारियों को पैसे खिलाकर कई साल से कंस्ट्रक्शन साइट पर मौत की दुकान सजाए हुए था.
पर अगर न्यूटन का क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम सही है तो जैसा नोएडा प्रशासन जितने भी उपाय युवराज को दोषी ठहराने के लिए करेगा उतना ही खुद फंसता जाएगा. यही हो भी रहा है. नोएडा में हर रोज शासन प्रशासन की नई नई कारगुजारियां सामने आ रही हैं. अब जो तथ्य सामने आ रहे हैं उसके बारे में कहा जा रहा है कि जिस जगह पर यह हादसा हुआ वह एक बहुत बड़े घोटाले का गवाह है. अधिकारियों को डर है कि कहीं परत दर परत वो सारी बातें पब्लिक डोमेन में न आ जाएं.
एक दिवालिया बिल्डर को कैसे मिली सेक्टर 150 की जमीन

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