
1958 में चीन पर परमाणु बम गिराने वाला था अमेरिका, लेकिन ऐसे पलटी बाजी
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शीत युद्ध के दौरान साल 1958 में अमेरिकी सेना चीन पर परमाणु हमला करना चाहती थी. 'पेंटागन पेपर्स' फेम शो के डेनियल एल्सबर्ग ने ऑनलाइन कुछ दस्तावेज पोस्ट किए हैं जिसमें ऐसा दावा किया गया है. न्यू यॉर्क टाइम्स ने भी इन दस्तावेजों को लेकर रिपोर्ट छापी है.
शीत युद्ध के दौरान साल 1958 में अमेरिकी सेना ने चीन पर परमाणु हमला करने की योजना बनाई थी. 'पेंटागन पेपर्स' फेम शो के डेनियल एल्सबर्ग ने ऑनलाइन कुछ दस्तावेज पोस्ट किए हैं जिसमें ऐसा दावा किया गया है. न्यू यॉर्क टाइम्स ने भी इन दस्तावेजों को लेकर रिपोर्ट छापी है. साल 1958 में ताइवान को कम्युनिस्ट ताकतों के हमले से बचाने के लिए अमेरिकी जनरल मुख्यभूमि चीन पर परमाणु हमला करने पर जोर दे रहे थे. अमेरिकी सेना को ये भी अंदाजा था कि सोवियत संघ चीन की मदद के लिए आगे आएगा और परमाणु हथियारों से हमले का जवाब देगा. हालांकि, उनका मानना था कि ताइवान की सुरक्षा के लिए अमेरिका को ये कीमत भी चुकाने में हिचकना नहीं चाहिए. पूर्व सैन्य विश्लेषक एल्सबर्ग ने इस सीक्रेट दस्तावेज के कुछ हिस्सों को ऑनलाइन प्रकाशित किया है. एल्सबर्ग की उम्र 90 साल है और वह वियतनाम युद्ध या पेंटागन पेपर्स से जुड़े गोपनीय दस्तावेज मीडिया को लीक करने के बाद प्रसिद्ध हुए थे.
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे. प्रधानमंत्री की अगुवाई में US कॉन्सुलेट तक मार्च निकाला गया. जबकि डेनमार्क और यूरोप ने NATO मौजूदगी बढ़ाने का संकेत दिया है. ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने से जुड़े बयान दिए हैं, जिसके बाद लोगों की नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है.

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अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए हैं. अमेरिका का विमानवाहक युद्धपोत अब्राहम लिंकन समुद्र के रास्ते ईरान के करीब पहुंच चुका है जिससे ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध की आशंकाएं बढ़ गई हैं. वहीं अरब देश अमेरिका को ईरान पर हमला करने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं. दूसरी ओर, ईरान ने इजरायल के आठ प्रमुख शहरों पर हमले की योजना तैयार की है. इस बढ़ती तनाव की स्थिति से मध्य पूर्व में सुरक्षा खतरे और बढ़ सकते हैं.

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