
17 साल की उम्र में जेल गया, कश्मीर को दहलाया... कहानी यासीन मलिक के गुनाहों की
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प्रतिबंधित संगठन जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के चीफ यासीन मलिक को दिल्ली कोर्ट ने गुरुवार को टेरर फंडिंग मामले में दोषी ठहराया है. यासीन मलिक ने आरोपों को कबूल कर लिया था कि वह कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में शामिल था.
तारीख थी 13 अक्टूबर 1983. जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर स्टेडियम में भारत और वेस्ट इंडीज के बीच क्रिकेट मैच चल रहा था. लंच ब्रेक हुआ. तभी कुछ लोग पिच के पास चले गए और उसे खराब करने की कोशिश की. इस मामले में 12 लोगों पर मुकदमा चलाया गया. ये पूरा कांड जिस संगठन ने किया था, उसका नाम था 'ताला पार्टी.'
दो साल बाद 13 जुलाई 1985 को ख्वाजा बाजार में नेशनल कॉन्फ्रेंस की रैली हो रही थी. इस रैली में 70 लड़के पहुंचे और पटाखे फोड़ दिया. सबको लगा कि बम विस्फोट हुआ है. चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई. नेशनल कॉन्फ्रेंस ने एक 19 साल के लड़के को पकड़ लिया. इस लड़के का नाम था- यासीन मलिक.
वो यासीन मलिक, जिसने जम्मू-कश्मीर में आतंक को बढ़ाया. कश्मीर की आजादी की वकालत करता रहा. बम-बारूद और बंदूक के दम पर डर फैलाता रहा. आज उसी यासीन मलिक की सजा का ऐलान होना है. यासीन मलिक पर आतंकी घटनाओं से जुड़ने और कश्मीर घाटी में माहौल खराब करने की साजिश रचने का दोष सिद्ध हुआ है.
मलिक पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (UAPA) की धारा 16 (आतंकी गतिविधि), धारा 17 (आतंकी फंडिंग), धारा 18 (आतंकी गतिविधि की साजिश) और धारा 20 (आतंकवादी गिरोह या संगठन का सदस्य होना) सहित आईपीसी की धारा 120-B (आपराधिक साजिश) और 124-A (राजद्रोह) के तहत केस दर्ज किया गया था. ये मामला 2017 का है. यासीन मलिक ने खुद अपना गुनाह कबूल किया है.
यासीन मलिक अभी तिहाड़ जेल में बंद है. वो पहली बार जब जेल गया था, तब उसकी उम्र मात्र 17 साल थी.
ये 'ताला पार्टी' की कहानी क्या है...?

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