
15 सीटों की जंग, क्रॉस वोटिंग का साया... यूपी से कर्नाटक तक, जानिए राज्यसभा चुनाव में कहां किसका गेम बन-बिगड़ रहा
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राज्यसभा चुनाव में आज वोटिंग है. यूपी की 10, कर्नाटक की चार और हिमाचल प्रदेश की एक सीट के लिए मतदान होना है. कड़े मुकाबले में फंसी इन राज्यों की सीटों पर कहां किसका गेम बनता दिख रहा है और किसका बिगड़ रहा?
राज्यसभा की 56 सीटों के लिए हो रहे चुनाव में 41 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं. तीन राज्यों यूपी, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक की 15 सीटों के लिए आज मतदान होना है. इन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने संख्याबल के आधार पर जितनी सीटों पर जीत सुनिश्चित है, उनके मुकाबले अतिरिक्त उम्मीदवार उतार दिया है. यूपी की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 11 उम्मीदवार मैदान में हैं. कर्नाटक की चार सीटों के लिए पांच और हिमाचल प्रदेश की एक सीट के लिए दो उम्मीदवार मैदान में हैं.
यूपी में क्या हैं समीकरण?
यूपी विधानसभा की चार सीटें रिक्त हैं और 403 सदस्यों वाली इस विधानसभा की स्ट्रेंथ 399 सदस्यों की है. 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं. ऐसे में हर उम्मीदवार को जीत सुनिश्चित करने के लिए 37 विधायकों के प्रथम वरीयता के वोट चाहिए होंगे. बीजेपी के पास सुभासपा, अपना दल, राष्ट्रीय लोक दल जैसे सहयोगी दलों को मिलाकर 286 विधायक हैं. राजा भैया की पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के भी दो विधायक हैं.
राजा भैया साफ कर चुके हैं कि उनकी पार्टी के विधायक बीजेपी उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करेंगे. इस तरह संख्याबल 288 पहुंच जाता है. संख्याबल के आधार पर देखें तो बीजेपी आठवें उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए जरूरी 296 प्रथम वरीयता के वोट के आंकड़े से आठ वोट पीछे है. दूसरी तरफ, सपा के 108 विधायक हैं जिनमें से एक इरफान सोलंकी जेल में बंद हैं. इरफान को वोटिंग की इजाजत नहीं मिली है. अब सपा की स्ट्रेंथ 107 विधायकों की बची.
कांग्रेस और सपा का गठबंधन है. कांग्रेस के भी दो विधायक हैं. इस तरह सपा-कांग्रेस का संख्याबल 109 पहुंच जाता है. बसपा के एक विधायक का समर्थन भी अगर सपा हासिल कर ले तो संख्याबल 110 ही पहुंचता है जो तीन सीटें जीतने के लिए जरूरी 111 के आंकड़े से एक कम है. सपा ने हर एक उम्मीदवार को 37-37 विधायक भी आवंटित कर दिए. यह भी कह दिया कि सभी उम्मीदवार अपने-अपने वोट डलवाएं, यह उनकी जिम्मेदारी होगी.
लेकिन अब समस्या यह है कि सपा के आठ विधायक मतदान से ठीक पहले वाली रात अखिलेश यादव के डिनर से नदारद रहे. विपक्ष को इसके बाद अब क्रॉस वोटिंग का डर भी सताने लगा है. कहां सपा यह उम्मीद पाले थी कि जयंत चौधरी और ओमप्रकाश राजभर की पार्टी में जो उसके लोग हैं, वह जरूरत के समय अखिलेश के उम्मीदवारों का बेड़ा पार करा देंगे और कहां उसके अपने विधायकों के ही खिसकने का खतरा गहरा गया है.

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