
हॉस्पिटल से चोरी या जरूरतमंदों की मजबूरी का उठाया फायदा... दिल्ली के चाइल्ड ट्रैफिकिंग केस में CBI ने खोला नया राज, रिमांड पर 7 आरोपी
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इस रैकेट के मास्टरमाइंड नीरज और इंदु हैं. अब तक की जांच के मुताबिक, ये अस्पतालों से बच्चों को चोरी नहीं करते थे. ये गरीब लोगों की सहमति से या जिनको पैसों की जरूरत होती थी, उनसे बच्चे खरीद लेते थे. इसके बाद सोशल मीडिया पर विज्ञापन देकर देशभर के निःसंतान दंपतियों से संपर्क करते थे. उन्हें 4 से 6 लाख रुपये में बेच देते थे.
सीबीआई ने दिल्ली के केशव पुरम इलाके में छापेमारी के बाद मानव तस्करी गैंग में शामिल सभी 7 आरोपियों को कोर्ट में पेश किया. इसके साथ ही आरोपियों की 4 दिन की रिमांड भी हासिल कर ली है. इस रैकेट के मास्टरमाइंड नीरज और इंदु हैं. गिरफ्तार किए गए लोगों में अस्पताल के वार्ड बॉय समेत कुछ महिला और पुरुष शामिल हैं.
अब तक की जांच के मुताबिक, ये अस्पतालों से बच्चों को चोरी नहीं करते थे. ये गरीब लोगों की सहमति से या जिन लोगों को पैसों की जरूरत होती थी, उनसे बच्चे खरीद लेते थे. कई बार ये गरीबों से एडवांस में बच्चे ले लिया करते थे फिर आगे निःसंतान लोगों को बेचते थे. सीबीआई अब बरामद बच्चों की डिटेल्स खंगाल रही है.
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पहले मिली थी अस्पताल से बच्चे चोरी की जानकारी
अब सीबीआई यह पता करने की कोशिश कर रही है कि इन बच्चों का कहां से खरीदा गया था. इससे पहले ये जानकारी सामने आई थी कि वे बच्चों को अस्पतालों से चुराते थे. इसको लेकर आरोपियों से पूछताछ की जा रही है. माना जा रहा है कि इस जांच में आगे और खुलासे हो सकते हैं. सीबीआई इस मामले में दूसरे राज्यों में भी छापेमारी कर सकती है.
रेस्क्यू किए गए बच्चों में 36 घंटे के नवजात भी था

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