
हैदराबाद: राहुल ने जेल में की NSUI नेताओं से मुलाकात, युवाओं को पार्टी से जुड़ने की अपील
AajTak
तेलंगाना में विधानसभा चुनाव को देखते हुए सभी पार्टियों ने अभी से कमर कसना शुरू कर दिया है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी तेलंगाना दौरे पर हैं. उन्होंने जेल में NSUI नेताओं से मुलाकात की.
तेलंगाना में अगले साल विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं. सभी पार्टियां अभी से चुनावी मोड में आ गई हैं. इसी कड़ी में राहुल गांधी भी राज्य के दौरे पर हैं. राहुल गांधी ने शनिवार को हैदराबाद की चंचलगुडा जेल में NSUI के प्रदेश अध्यक्ष वेंकट बालमूर और 18 अन्य नेताओं से मुलाकात की. वेंकट और अन्य को उस्मानिया विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के बाहर विरोध प्रदर्शन करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद राहुल ने हैदराबाद में युवाओं को कांग्रेस पार्टी में शामिल होने और राज्य की गतिशीलता को बदलने के लिए आमंत्रित किया. उन्होंने कहा कि सोनिया जी ने आपके साथ तेलंगाना का सपना देखा और आपको राज्य का दर्जा दिया. कांग्रेस को नुकसान हुआ, लेकिन सच्चाई के वास्ते लड़ने के लिए हम आपके साथ खड़े हैं.
आपस की बात मीडिया में करना सही नहीं कांग्रेस नेता ने कहा कि हम RSS नहीं हैं, जहां एक व्यक्ति ही डिसीजन लेता है. परिवार में विवाद होता है, हमारे यहां भी है. हम सब की आवाज सुनना चाहते हैं, मगर मीडिया में नहीं. अगर कोई मीडिया में बात करता है तो वो कांग्रेस पार्टी को डैमेज कर रहा है वो हमें स्वीकार नहीं होगा. उन्होंने कहा कि परिवार में मतभेद हो सकते हैं इसका मतलब यह नहीं है कि आप मीडिया में जाकर अपनी बात रखें.
रैली में पांच लाख से अधिक लोग शामिल राहुल ने कहा, कांग्रेस पार्टी की आत्मा उसके समर्पित कार्यकर्ता हैं, जो अन्याय के खिलाफ निस्वार्थ लड़ाई लड़ रहे हैं. मैं उनके साथ हमेशा खड़ा रहूंगा. कांग्रेस नेता ने शुक्रवार को वारंगल में एक बड़ी रैली को संबोधित किया. कांगेस का दावा है कि इस रैली में पांच लाख से अधिक लोग शामिल हुए.
वारंगल में राहुल गांधी ने शुक्रवार को घोषणा की थी कि उनका टीआरएस के साथ कोई गठबंधन नहीं होगा. तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव पर हमला करते हुए, राहुल ने कहा कि टीआरएस प्रमुख केसीआर एक "राजा" थे, वे सीएम नहीं थे. क्योंकि वह लोगों की आवाज नहीं सुनते थे.
कांग्रेस नेता ने कहा, आज यह कहा जाता है कि तेलंगाना में एक मुख्यमंत्री है, लेकिन वह एक 'राजा' (राजा) है मुख्यमंत्री नहीं है, जो लोगों की नहीं बल्कि अपनी आवाज सुनता है. मुख्यमंत्री लोगों को सुनने के बाद निर्णय लेते हैं, लेकिन एक राजा का लोकतंत्र से कोई लेना-देना नहीं है और वह वही करता है जो वह सोचता है.

नोएडा केवल उत्तर प्रदेश का शो विंडो नहीं है, बल्कि प्रति व्यक्ति आय, प्रति व्यक्ति कंज्यूमर शॉपिंग, प्रति व्यक्ति इनकम टैक्स, प्रति व्यक्ति जीएसटी वसूली आदि में यह शहर देश के चुनिंदा टॉप शहरों में से एक है. पर एक शहरी की जिंदगी की सुरक्षा की गारंटी नहीं देता है. बल्कि जब उसकी जान जा रही हो तो सड़क के किनारे मूकदर्शक बना देखता रहता है.

उत्तर प्रदेश की सरकार और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच चल रहे विवाद में नई उर्जा आई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने खुली चुनौती के साथ योगी आदित्यनाथ को उनके शंकराचार्य होने पर सवाल उठाए हैं. इस मुद्दे ने राजनीति में तेजी से हलचल मचा दी है जहां विपक्ष शंकराचार्य के समर्थन में खड़ा है जबकि भाजपा चुप्पी साधे हुए है. दूसरी ओर, शंकराचार्य के विरोधी भी सक्रिय हुए हैं और वे दावा कर रहे हैं कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ही सच्चे स्वयंभू शंकराचार्य हैं.

उत्तर प्रदेश की सियासत में उल्टी गंगा बहने लगी है. मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर हुआ विवाद अब बड़ा मुद्दा बन गया है. जहां खुद अविमुक्तेश्वरानंद के तेवर सरकार पर तल्ख हैं, तो वहीं बीजेपी पर शंकराचार्य के अपमान को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज में संगम नोज तक पालकी पर जाकर स्नान करने से उन्हें रोका था.

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

संभल में दंगा मामले के बाद सीजेएम के तबादले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इस पर सीजेएम का अचानक तबादला हुआ और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. इस विवाद में राजनीतिक सियासत भी जुड़ी है. हाई कोर्ट के आदेशानुसार जजों के ट्रांसफर होते हैं लेकिन इस बार बहस हुई कि क्या यहां राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया.







