
हेमा समिति की रिपोर्ट में मलयालम इंडस्ट्री के बारे में कई चौंकाने वाले दावे, फिर से सुर्खियों में #MeToo
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19 अगस्त को हेमा समिति की रिपोर्ट जारी की गई, जिसमें मलयालम इंडस्ट्री में यौन उत्पीड़न, शोषण और लॉबिंग का खुलासा किया गया है. आइए जानते हैं कि समिति के गठन की वजह क्या थी और अब तक क्या सामने आया है.
हेमा समिति (Hema Committee) की रिपोर्ट केरल (Kerala) के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को सौंपे जाने के पांच साल बाद 19 अगस्त, 2024 को जारी की गई. चौंकाने वाली रिपोर्ट में शोषण, यौन उत्पीड़न, सत्ता के दुरुपयोग और लॉबिंग के बारे में काले कारनामे सामने आए हैं. रिपोर्ट जारी होने के बाद से ही कुछ महिलाएं अभिनेताओं और निर्देशकों के खिलाफ यौन दुराचार के आरोप लगाने के लिए आगे आई हैं.
कहां से शुरू हुआ था मामला?
फरवरी 2017 में, एक लोकप्रिय मलयालम अभिनेत्री (जो तमिल और कन्नड़ फिल्मों में अपने अभिनय के लिए मशहूर हैं) पर कथित तौर पर चलती कार में हमला किया गया था. पांच लोगों ने उनका अपहरण कर लिया, हमले का वीडियो बनाया और उसे वहीं छोड़ दिया. अभिनेत्री ने हिम्मत जुटाई और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.
जांच के दौरान पता चला कि केरल के एक शक्तिशाली और प्रभावशाली शख्स मलयालम अभिनेता दिलीप ने कथित तौर पर कुछ लोगों के साथ मिलकर अभिनेत्री को 'सबक सिखाने' की साजिश रची थी.
एक्टर पर हमले का केस कोर्ट में अभी भी चल रहा है. पिछले कुछ वर्षों में कई गवाह अपने बयान से पलट गए. कई साल बाद, निर्देशक बालचंद्र कुमार ने चौंकाने वाले दावे किए कि अभिनेता दिलीप के पास मजिस्ट्रेट की अदालत में हमले के सीन देखने से पहले ही मौजूद थे. उनके आरोप मामले में एक अहम मोड़ साबित हुए.
सिनेमा में महिलाओं का समूह (WCC) का गठन

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