
हिमाचल प्रदेश चुनावः बीजेपी के 62 उम्मीदवार घोषित, सिराज से जयराम ठाकुर मैदान में, धूमल का टिकट कटा
AajTak
हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने 62 सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है. बीजेपी ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को सिराज विधानसभा सीट से टिकट दिया है. पिछले चुनाव में मुख्यमंत्री के लिए पार्टी का चेहरा रहे प्रेम कुमार धूमल का पत्ता इसबार साफ हो गया है.
हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है. बीजेपी ने पहली लिस्ट में 62 सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों का ऐलान किया है. बीजेपी ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को सिराज विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है. वहीं, पिछले चुनाव में बीजेपी की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार रहे प्रेम कुमार धूमल का इस बार पत्ता साफ हो गया है.
बीजेपी ने सतपाल सिंह सत्ती को उना और अनिल शर्मा को मंडी से चुनाव मैदान में उतारा है. पवन काजल कांगड़ा को बीजेपी से टिकट मिला है. बीजेपी ने हमीरपुर सीट से नरेंद्र ठाकुर और सुजानपुर सीट से कैप्टन (रिटायर्ड) रणजीत सिंह को उम्मीदवार बनाया है. पिछले चुनाव में मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल का पत्ता इसबार साफ हो गया है.
बीजेपी की ओर से जारी की गई 62 उम्मीदवारों की पहली सूची में हिमाचल प्रदेश के दो बार मुख्यमंत्री रहे दिग्गज नेता प्रेम कुमार धूमल का नाम नहीं है. प्रेम कुमार धूमल के सुजानपुर या हमीरपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की अटकलें लगाई जा रही थीं लेकिन जब उम्मीदवारों की लिस्ट आई तो दोनों में से किसी भी सीट से उन्हें टिकट नहीं दिया गया.
बीजेपी ने कहां से किसे दिया टिकट
बीजेपी ने अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित चुराह सीट से हंस राज, भरमौर सीट से डॉक्टर जनक राज, चम्बा सीट से इंदिरा कपूर और डलहौजी से डीएस ठाकुर को टिकट दिया है. सत्ताधारी पार्टी ने भटियाल सीट से विक्रम जरयाल, नूरपुर से रणवीर सिंह निक्का, इंदौरा से रीता धीमान, फतेहपुर से राकेश पठानिया, जवाली से संजय गुलेरिया, जसवां प्रागपुर से विक्रम ठाकुर और जयसिंहपुर से रविंदर धीमान पर दांव लगाया है.
सुलह से विपिन सिंह परमार, नगरोटा से अरुण कुमार मेहरा, कांगड़ा से पवन काजल, शाहपुर से सरवीण चौधरी, धर्मशाला से राकेश चौधरी पालमपुर से त्रिलोक कपूर, बैजनाथ से मुल्खराज प्रेमी और लाहौल स्पीति सीट से बीजेपी ने डॉक्टर रामलाल मारकण्डेय पर दांव लगाया है.

ट्रंप की ईरान को दी गई उस धमकी के बारे में बताएंगे जिसमें उन्होंने कहा कि कि ईरान दुनिया के नक्शे से मिट जाएगा. उनका ये बयान उस संदर्भ में आया है जिसमें दावा किया जा रहा है कि ईरान ट्रंप की हत्या कर सकता है. इस पर ट्रंप ने कहा अगर उन्हें कुछ भी हुआ तो अमेरिका की सेनाएं ईरान को धरती के नक्शे से मिटा देंगी. आज इस बात का विश्लेषण करेंगे कि क्या वाकई ईरान ट्रंप की हत्या की साजिश रच रहा है?

मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर विवाद गहराया है. अविमुक्तेश्वरानंद सरकार पर कड़े तेवर दिखा रहे हैं. उन पर शंकराचार्य के अपमान का आरोप लगा है. समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रयागराज में संगम नोज तक पालकी पर बैठकर अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान करने से प्रशासन ने रोक लगा दी. समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई.

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद आमने सामने हैं. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सीधे सीधे योगी आदित्यनाथ को चुनौती दे रहे हैं तो प्रशासन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से पूछ रहा है कि बताएं वो शंकराचार्य कैसे हैं. लेकिन बात अब इससे भी आगे बढ़ गई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विरोधी उन्हें स्वयंभू शंकराचार्य बता रेह हैं.

227 सदस्यीय BMC में बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत होती है. महायुति ने 118 वार्ड जीतकर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. इसके बावजूद मेयर पद को लेकर सहमति नहीं बन पाई है. स्थिति तब और नाटकीय हो गई, जब शिंदे ने कथित खरीद-फरोख्त की आशंका के चलते नवनिर्वाचित 29 शिवसेना पार्षदों को सप्ताहांत में एक फाइव-स्टार होटल में ठहरा दिया.

नोएडा केवल उत्तर प्रदेश का शो विंडो नहीं है, बल्कि प्रति व्यक्ति आय, प्रति व्यक्ति कंज्यूमर शॉपिंग, प्रति व्यक्ति इनकम टैक्स, प्रति व्यक्ति जीएसटी वसूली आदि में यह शहर देश के चुनिंदा टॉप शहरों में से एक है. पर एक शहरी की जिंदगी की सुरक्षा की गारंटी नहीं देता है. बल्कि जब उसकी जान जा रही हो तो सड़क के किनारे मूकदर्शक बना देखता रहता है.

उत्तर प्रदेश की सरकार और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच चल रहे विवाद में नई उर्जा आई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने खुली चुनौती के साथ योगी आदित्यनाथ को उनके शंकराचार्य होने पर सवाल उठाए हैं. इस मुद्दे ने राजनीति में तेजी से हलचल मचा दी है जहां विपक्ष शंकराचार्य के समर्थन में खड़ा है जबकि भाजपा चुप्पी साधे हुए है. दूसरी ओर, शंकराचार्य के विरोधी भी सक्रिय हुए हैं और वे दावा कर रहे हैं कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ही सच्चे स्वयंभू शंकराचार्य हैं.

उत्तर प्रदेश की सियासत में उल्टी गंगा बहने लगी है. मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर हुआ विवाद अब बड़ा मुद्दा बन गया है. जहां खुद अविमुक्तेश्वरानंद के तेवर सरकार पर तल्ख हैं, तो वहीं बीजेपी पर शंकराचार्य के अपमान को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज में संगम नोज तक पालकी पर जाकर स्नान करने से उन्हें रोका था.






