
'हमारी मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा विरोध', किसान नेता पंढेर बोले- आंदोलन का आचार संहिता से लेना-देना नहीं
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पंढेर ने कहा कि हमारा विरोध तब तक शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं हो जातीं. उन्होंने कहा कि विरोध का आदर्श आचार संहिता से कोई लेना-देना नहीं है, जो आम चुनाव की घोषणा के साथ लागू हुई है. उन्होंने कहा कि हम किसानों और खेत मजदूरों के लिए अपना एजेंडा लोगों के सामने रख रहे हैं.
किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि पंजाब और हरियाणा के 2 बॉर्डर पर किसान डेरा डाले हुए हैं. ये किसान तब तक अपनी आंदोलन जारी रखेंगे जब तक इनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं. संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मुक्ति मोर्चा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी सहित अन्य मांगों को लेकर आंदोलनरत है. पंजाब के प्रदर्शनकारी किसान 13 फरवरी से शंभू और खनौरी बॉर्डर पर डेरा डाले हुए हैं, क्योंकि दिल्ली कूच के दौरान उन्हें सुरक्षा बलों ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया था, ऐसे में किसान वहीं बैठ गए.
पंढेर ने कहा कि हमारा विरोध तब तक शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं हो जातीं. उन्होंने कहा कि विरोध का आदर्श आचार संहिता से कोई लेना-देना नहीं है, जो आम चुनाव की घोषणा के साथ लागू हुई है. उन्होंने कहा कि हम किसानों और खेत मजदूरों के लिए अपना एजेंडा लोगों के सामने रख रहे हैं.
शंभू और खनौरी बॉर्डर भारी बैरिकेडिंग के साथ-साथ हरियाणा के सुरक्षाकर्मी तैनात हैं. पंढेर ने उन्हें ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ राष्ट्रीय राजधानी की ओर जाने की अनुमति नहीं देने के लिए भाजपा सरकार की आलोचना की. उन्होंने पूछा कि हमें अपनी मांगों के समर्थन में दिल्ली जाने की अनुमति क्यों नहीं दी जा रही है. पंढेर ने कहा कि अमृतसर, जंडियाला और ब्यास से किसान और खेतों में मजदूरी करने वाले कई लोग बॉर्डर पर एकत्र हो रहे हैं.
बता दें कि किसान स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने, किसानों और खेतिहर मजदूरों के लिए पेंशन, बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं, पुलिस मामलों को वापस लेने और 2021 लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए "न्याय", भूमि अधिग्रहण अधिनियम की बहाली और 2020-21 में हुए किसान आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजे की मांग कर रहे हैं.

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