
वियतनाम की वो 'नेपाम गर्ल', ग़ज़ा के बच्चे और ईरान की स्कूली छात्राएं...मोहम्मद हनीफ़ का ब्लॉग
BBC
ईरान और अमेरिका के बीच मौजूदा जंग में बच्चियों के स्कूल पर हमले पर वरिष्ठ पाकिस्तानी पत्रकार मोहम्मद हनीफ़ कहते हैं कि चाहे वियतनाम हो, ग़ज़ा हो या ईरान हो मासूम बच्चों के बारे में सोच में कोई अंतर नहीं दिखाई देता.
(इस लेख के कुछ हिस्से आपको विचलित कर सकते हैं)
आज से लगभग 50 साल पहले वियतनाम में जंग हुई थी. उस समय न तो इंटरनेट था और न ही मोबाइल फ़ोन और हफ्तों या महीनों बाद जंग की खबरें हम तक पहुंचती थीं.
अमेरिका वियतनाम पर नेपाम बम गिराता था, जो आग लगा देते थे. फसलों को, जानवरों को, लोगों को जलाकर राख कर देते थे.
उस समय एक फ़ोटो छपी, जिसमें एक 9 साल की बच्ची, जो नेपाम बम से जल रही थी, सड़क पर दौड़ रही थी. अख़बारों में फोटो छपी और जनता को पता चला कि वियतनाम में अमेरिकी सेना क्या कर रही है.
उस लड़की का नाम 'किम' था, लेकिन वह नेपाम गर्ल के नाम से मशहूर हो गई. लोग चिल्लाए, जुलूस निकाले, लेकिन जंग अगले तीन साल तक चलती रही.
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किम की फ़ोटो ने हालांकि जंग तो नहीं रुकवाई, पर जनता ने यह शोर ज़रूर डाल दिया कि हमारे नाम पर और हमारे टैक्स के पैसे से इतना ज़ुल्म न करें.

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