
ईरान युद्ध ने बता दिया कि दुनिया खाड़ी के तेल और गैस पर किस हद तक निर्भर है
BBC
सिर्फ़ तेल ही नहीं, दुनिया के कुछ देशों में खाद्य सामग्री का आयात भी बाधित हो रहा है. युद्ध के कारण तेल और गैस की सप्लाई में लगातार बढ़ती दिक्कतों से कई देशों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है.
ईरान के साथ अमेरिका और इसराइल के युद्ध ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दुनिया खाड़ी क्षेत्र से मिलने वाले तेल और गैस पर कितनी निर्भर है.
जब से यह लड़ाई शुरू हुई है, तेल की कीमत आसमान छू गई है और अभी यह 100 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है. शिपिंग और ऊर्जा के बुनियादी ढांचे पर हवाई हमलों और होर्मुज स्ट्रेट के पूरी तरह बंद होने से यह और बढ़ गया है.
यह जलमार्ग एनर्जी शिपमेंट के लिए एक ज़रूरी रास्ता है, जहां से दुनिया भर में तेल सप्लाई का क़रीब 20% गुज़रता है.
तेल और गैस का यह संकट जिस तरह से एशियाई देशों में महसूस हो रहा है, वैसा कहीं और नहीं है. पिछले साल, होर्मुज स्ट्रेट से गुज़रने वाले कुल तेल और गैस का लगभग 90% इसी इलाक़े में भेजा गया था.
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आम लोग अपने घरों को गर्म करने, अपनी गाड़ियों में ईंधन भरने और बिजली उत्पादन के लिए इस पर निर्भर हैं. इस इलाके के बड़े मैन्युफैक्चरिंग उद्योग को चलाने के लिए कारोबार जगत को भी तेल और गैस की ज़रूरत होती है.
फ़ारस की खाड़ी में रुकावट के कारण ख़ासकर साउथ-ईस्ट एशिया इसकी वजह से बहुत ज़्यादा असुरक्षित है.

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