
पाकिस्तानी नौसेना के 'ऑपरेशन मुहाफ़िज़ अल-बहर' का मक़सद क्या है?
BBC
एक्सपर्ट्स के मुताबिक़, यह पहली बार है जब किसी युद्ध के दौरान कमर्शियल शिपिंग की सुरक्षा के लिए पाकिस्तानी वॉरशिप तैनात किए गए हैं, और यह ऐसे समय में हुआ है जब ईरान "स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में सुरंगें बिछा रहा है और अमेरिका ईरानी नौसेना को निशाना बना रहा है."
ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका और इसराइल की कार्रवाई और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के बंद होने के ख़तरे के बीच पाकिस्तान की नौसेना ने समुद्री रास्तों से होने वाली व्यापारिक आवाजाही और तेल की बिना रुकावट आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए 'ऑपरेशन मुहाफ़िज़-उल-बहर' (समुद्र का रखवाला) शुरू किया है.
पाकिस्तानी नौसेना का कहना है कि इस ऑपरेशन का मक़सद सी लाइन्स ऑफ़ कम्युनिकेशन (एसएलओसी) की सुरक्षा और बिना रुकावट राष्ट्रीय शिपिंग को जारी रखना है.
एसएलओसी से मतलब उन अहम समुद्री रास्तों से है जो बंदरगाहों के बीच होते हैं और जिनका इस्तेमाल व्यापार और नौसैनिक गतिविधियों के लिए किया जाता है.
पाकिस्तानी नौसेना के मुताबिक़ देश की लगभग 90 प्रतिशत व्यापारिक गतिविधियां समुद्री रास्तों से होती हैं. इसलिए मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के दौरान पाकिस्तान नेशनल शिपिंग कॉरपोरेशन (पीएनएससी) के साथ मिलकर व्यापारिक जहाज़ों की सुरक्षा के लिए नौसेना के युद्धपोत तैनात किए जाएंगे और समुद्री ट्रैफ़िक पर नज़र रखी जाएगी.
नौसेना ने सोशल मीडिया पर एक ऑयल टैंकर के साथ अपने युद्धपोत की तस्वीरें भी साझा की हैं.
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पाकिस्तानी सेना के जनसंपर्क विभाग आईएसपीआर ने अपने बयान में समुद्री व्यापार को होने वाले "मल्टी-डायमेंशनल ख़तरों" का ज़िक्र करते हुए बताया कि दो टैंकरों के साथ नौसेना के युद्धपोत तैनात किए गए हैं.

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