
सेना पर भारी पड़े जेल में बंद इमरान! जानें PAK चुनाव में निर्दलीय कैसे बन सकते हैं किंगमेकर
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इमरान की पार्टी के समर्थित उम्मीदवारों ने सेना की पसंद माने जा रहे पीएमएलएन चीफ नवाज शरीफ की पार्टी को फिलहाल रेस में पीछे छोड़ दिया है. इमरान को जेल में रखने का एक मकसद उन्हें चुनावी दौड़ से दूर रखना भी माना जा रहा था. लेकिन रूझानों के मुताबिक उनकी पार्टी के समर्थित उम्मीदवारों की जीत ने सेना के मंसूबों पर पानी फेर दिया है. ऐसे में कयास लगने लगे हैं कि अब समय आ गया है कि पाकिस्तानी सेना को आत्मनिरीक्षण करने की जरूरत है.
पाकिस्तान में भारी उथल-पुथल के बीच आठ फरवरी को संसदीय चुनाव हुए. फिलहाल वोटों की गिनती जारी है. चुनाव से पहले नवाज शरीफ की पार्टी को फ्रंटरनर बताया जा रहा था. लेकिन जेल के भीतर से चुनाव की कमान संभाल रहे इमरान खान ने सभी को चौंका दिया है. उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के समर्थित उम्मीदवार सबसे आगे चल रहे हैं.
इमरान की पार्टी के समर्थित उम्मीदवारों ने सेना की पसंद माने जा रहे पीएमएलएन चीफ नवाज शरीफ की पार्टी को फिलहाल रेस में पीछे छोड़ दिया है. इमरान को जेल में रखने का एक मकसद उन्हें चुनावी दौड़ से दूर रखना भी माना जा रहा था. लेकिन रूझानों के मुताबिक उनकी पार्टी के समर्थित उम्मीदवारों की जीत ने सेना के मंसूबों पर पानी फेर दिया है. ऐसे में कयास लगने लगे हैं कि अब समय आ गया है कि पाकिस्तानी सेना को आत्मनिरीक्षण करने की जरूरत है.
पाकिस्तान के राजनीतिक इतिहास में 9 फरवरी अब एक महत्वपूर्ण तारीख बन गई है. देश परिवर्तन के मुहाने पर खड़ा है लेकिन चुनाव के नतीजों पर संशय बना हुआ है. पीटीआई समर्थित उम्मीदवार इंटरनेट पर रोक और निर्वाचन क्षेत्रों के लिए स्पष्ट निर्देशों की कमी जैसी चुनौतियों को पार करते हुए रेस में आगे हैं.
पीटीआई के निर्दलीय उम्मीदवार हो सकते हैं गेमचेंजर
चुनाव आयोग ने इमरान खान की पार्टी पीटीआई के चुनाव चिह्न बैट को रद्द कर दिया था, जिसके बाद उनकी पार्टी के उम्मीदवार निर्दलीयोंक के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं. अब यही निर्दलीय सेना का गेम बिगाड़ सकते हैं. दरअसल चुनाव में जीतने वाले उम्मीदवारों सांसद बनेंगे जबकि निर्दलीयों के पास चुनाव के बाद किसी भी पार्टी में शामिल होने का विकल्प होगा.
पाकिस्तान के एक पत्रकार का कहना है कि नियमों के तहत निर्दलीयों को एक महीने के भीतर किसी भी पार्टी में शामिल होना होगा. अगर ऐसा होता है तो पीटीआई के समर्थित उम्मीदवार इमरान खान के गठबंधन वाले किसी भी छोटे दल में शामिल होकर संसदक पहुंच सकते हैं. इसके बाद उन्हें पार्टी की आरक्षित सीटें मिलेंगी. इसके बाद वे अपना अगल कदम उठा सकते हैं.

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